ग्वालियर।
ग्वालियर में भगवान कार्तिकेय का सबसे प्राचीन मंदिर है जो साल में एक केवल एक दिन कार्तिक पूर्णिमा को श्रद्धालुओं के लिए खुलता है। बीते रोज कार्तिक पूर्णिमा के पावन दिन मंदिर के पट खुले तो मानो पूरा ग्वालियर भगवान कार्तिकेय के दर्शन को उमड़ पड़ा। दर्शन के बाद श्री राजेंद्र शिवहरे के परिवार की ओर से प्रत्येक श्रद्धालु को भोग-प्रसादी प्रदान की गई।
जीवाजीगंज स्थित कार्तिकेत मंदिर की ख्याति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बीते रोज ‘कलचुरी कलार समाज ग्वालियर’ द्वारा आयोजित ‘भगवान सहस्रबाहु जयंती महोत्सव एवं कलचुरी युवक-युवती वैवाहिक परिचय सम्मेलन व अन्नकूट समारोह’ मे दूर-दराज से आए तमाम अतिथि भी मंदिर के दर्शन करने पहुंचे। भोपाल की महापौर श्रीमती मालती राय ने भी सुबह यहां आकर सबसे पहले भगवान कार्तिकेय के दर्शन किए।
मंदिर में प्रथम प्रसाद चढ़ाने का सौभाग्य ट्रांसपोर्ट नगर निवासी ट्रांसपोर्ट कारोबारी श्री राजेंद्र शिवहरे को पिछले 21 वर्षों से प्राप्त हो रहा है। श्री राजेंद्र शिवहरे ने शिवहरेवाणी को बताया, ‘भगवान कार्तिकेय स्वामी की कृपा से जब मेरी मन्नत पूरी हुई, तो सबसे पहले भुने चने के आटे से बने 5 किलो लड्डू का प्रसाद चढ़ाकर वितरित किया था। भगवान कार्तिकेय की अनुकंपा से अब मैं एक क्विंटल 11 किलो का प्रसाद चढ़ा रहा हूं।‘.श्री राजेंद्र शिवहरे का पूरा परिवार कार्तिक पूर्णिमा के दिन श्रद्धालुओं की सेवा में रहता है और प्रत्येक श्रद्धालु को प्रसाद करता है।
बीते रोज श्री राजेंद्र शिवहरे के साथ ही उनकी धर्मपत्नी श्रीमती माया शिवहरे, पुत्र-पुरवधु दीपक शिवहरे-खुश्बू शिवहरे, अतुल शिवहरे-आराधना शिवहरे, विपिन शिवहरे-नेहा शिवहरे, पुत्री मानसी शिवहरे और दामाद अमित शिवहरे भी मौजूद रहे। अमित शिवहरे में एक राष्ट्रीय समाचार पत्र में फोटो जर्नलिस्ट हैं, औऱ शिवहरेवाणी के फोटो एडीटर व शिवहरे समाज एकता परिषद के संस्थापक-संयोजक भी हैं। परिवार के बच्चों देवराज, यशराज, युवराज, जयराज, राधिका, आरोही, चित्रांशी, प्रकृति और सम्राट ने भी पुण्य कार्य में बड़ों का हाथ बंटाया।
बता दें कि कार्तिक पूर्णिमा का पावन दिन भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र तथा प्रथम देव गणेश के भाई भगवान कार्तिकेय की आराधना का दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान कार्तिकेय के दर्शन मात्र से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। देश का सबसे प्राचीन मंदिर ग्वालियर में जीवाजी गंज स्थित इसी मंदिर को माना जाता है जिसके पट साल में केवल एक दिन यानी कार्तिक पूर्णिमा पर ही खुलते हैं। मंदिर के पुजारी पंडित जमुना प्रसाद शर्मा बताते हैं कि इसकी स्थापना का कोई सटीक लेख तो नहीं है, लेकिन सिंधिया शासकों के काल में इसका जीर्णोद्धार कराया गया था. तब से केवल कार्तिक पूर्णिका की मध्यरात्रि को मंदिर के पट खुलते हैं और बाकी पूरे साल यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए बंद रहता है। रात जैसे घड़ी में बारह बजते हैं, मंदिर के पुजारी परंपरानुसार भगवान का अभिषेक और आरती करते हैं और दर्शन के लिए द्वार खोल दिए जाते हैं। सुबह चार बजे श्री राजेंद्र शिवहरे और उनके परिवारीजन भगवान कार्तिकेय का भोग लगाते है और तब से देर रात प्रसाद समाप्त न होने तक लगातार श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित करते हैं।
ग्वालियर में साल में केवल एक दिन खुलता है भगवान कार्तिकेय का प्राचीन मंदिर; श्री राजेंद्र शिवहरे का परिवार की ओर से होती है मुख्य प्रसादी
