आगरा।
होना तो यह चाहिए था कि दाऊजी मंदिर की प्रबंध समिति के महासचिव श्री आशीष शिवहरे खुद पद से इस्तीफा देकर अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच की पेशकश करते। ऐसा नहीं तो समिति को ही आशीष शिवहरे से सवाल कर स्पष्टीकरण मांगना चाहिए था। लेकिन, इस दिशा में कुछ सोचने-करने के बजाय शिवहरेवाणी न्यूज पोर्टल के खिलाफ ही कुचक्र रचने शुरू हो गए हैं।
शिवहरेवाणी इनसे विचलित होने वाली नहीं, वह सत्य की नैतिक शक्ति के साथ हमेशा समाज की सेवा में तत्पर रहेगी। हम समाज के प्रति समर्पित न्यूज पोर्टल हैं, इस नाते हमारा फर्ज है कि दाऊजी मंदिर जैसी महान कलात्मक धरोहर के संरक्षण में प्रबंधन की लापरवाहियों और चूकों से प्रभावशाली तरीके से उठाएं। हमें भरोसा है कि ‘सही’ के पक्ष में खड़े ‘अंतरात्मा’ वाले लोग आगे भी अपनी सकारात्मक प्रतिक्रियाओं से हमें हौसला देंगे। ‘गलत’ के पक्ष में खड़े लोगों से हमें कोई अपेक्षा नहीं, औऱ हम उनकी परवाह भी नहीं करते है। हम यही हमारे पत्रकारिता पेशे की नैतिकता है, किसी से कुछ भी पर्सनल नहीं है। हम तो समाज में ज्वलंत औऱ महत्वपूर्ण विषयों पर हो रहीं चर्चाओं को अपने स्तर से यथासंभव पुष्ट कर उन्हें अपना मंच दे रहे हैं।
ऐसी ही एक चर्चा 13.5 लाख रुपये की धनराशि को लेकर है, और मामला दाऊजी महाराज की ‘अमानत में खयानत’ का है। मंदिर के मुख्यद्वार के निकट ‘महाकाली मिष्ठान्न भंडार’ के
प्रोपराइटर श्री शिवम शिवहरे ‘शिब्बे’ ने अपनी बगल वाली छोटी दुकान (पोंदे की दुकान) खरीदी और उसे अपनी दुकान में मिलवा कर उसे बड़ा करवाया था। यह बात पूर्ववर्ती अध्यक्ष श्री भगवान स्वरूप शिवहरे के कार्यकाल की है, औऱ दुकान मे काम भी उन्हीं के कार्यकाल में कराया गया था। बदले में शिब्बे को 13.5 लाख रुपये मंदिर समिति को देने थे, जिसका भुगतान श्री बिजनेश शिवहरे की अध्यक्षता वाली मौजूदा प्रबंध समिति के कार्यकाल में जनवरी, 2022 में किया गया।
शिब्बे ने 13.5 लाख रुपये की नगद धनराशि अपने एक निकट रिश्तेदार और धर्मपत्नी के साथ होटल जिज्ञासा पैलेस मे जाकर समिति के महासचिव श्री आशीष शिवहरे को सौंपी थी। लेकिन, आज चार साल बाद भी यह धनराशि दाऊजी महाराज के कोष में जमा नहीं हुई है। कोषाध्यक्ष श्री संतोष कुमार गुप्ता ने इस बात की पुष्टी करते हुए बताया कि बैंकिंग नियमों के अंतर्गत किसी भी बचत खाते में एक साल के अंदर दस लाख रुपये से अधिक जमा होने पर टैक्स लग जाता है। टैक्स बचाने की गरज से यह धनराशि बैंक में जमा नहीं कराई जा सकी थी। लेकिन यह धनराशि उन्हें नहीं दी गई है।
शिवहरेवाणी ने बैंक अधिकारियों से इस बारे मे बात की तो श्री संतोष कुमार गुप्ता की दलील सत्य पाई गई। लेकिन अधिकारियों ने यह भी बताया कि यदि सोर्स (जहां से पैसे आए) स्पष्ट कर दिए जाएं तो टैक्स में राहत मिल भी सकती है। मंदिर के ऑडीटर सीए दिलीप गुप्ता से इस बारे में बात की तो उन्होंने ऐसा कोई मामला मंदिर समिति द्वारा उनके संज्ञान लाए जाने से इनकार कर दिया। उन्होंने यह भी बताया कि चार साल में उनसे कभी मंदिर के खाते का लेखा-परीक्षण (ऑडीटिंग) नहीं कराया गया। यहां तक कि मंदिर की ओर से आय-व्यय का एक पर्चा तक उन्हें नहीं दिया गया है।
श्री संतोष कुमार गुप्ता ने शिवहरेवाणी को यह भी बताया कि दुकानों के किराये और शिवहरे सभागार से मंदिर की कुल आमदनी 5-6 लाख रुपये सालाना है। वर्तमान में मंदिर के खाते में करीब 20 लाख रुपये हैं। कोषाध्यक्ष से चर्चा में दो बातें स्पष्ट होती हैं। एक, समिति यदि अपने सीए (ऑडीटर) से बात करती तो संभव था कुछ समाधान निकल आता। दूसरे, समिति चार-चार लाख रुपये की रकम खाते में जमा करती तो तीन साल में पूरी धनराशि दाऊजी महाराज के खाते में पहुंच जाती। यदि यह राशि दाऊजी महाराज के खाते में समय से जमा करा दी जाती तो सोचिए, आज इस पर कुल कितनी बैंक ब्याज दाऊजी मंदिर के खाते में आ चुकी होती। दाऊजी महाराज के हक की धनराशि है कहां? किसके पास है, कौन इसे अपने काम में ले रहा है? दाऊजी महाराज के खाते में कब जमा होगी? धनराशि को होल्ड करने वाले से ब्याज ली जाएगी? और अंतिम सवाल, श्री शिवम शिवहरे ‘शिब्बे’ को प्राप्ति रसीद देने में इतना विलंब क्यों?
ये समाज के सवाल हैं, और इनके लिए भी पहली जवाबदेही श्री आशीष शिवहरे की बनती है क्योकि रकम उन्हीं को सौंपी गई थी। हम जानते हैं कि इन सवालों के जवाब भी नहीं आएंगे। हमने तो इन्हें प्रकाशित कर शिवहरे समाज और धरोहर के प्रति अपनी फर्ज अदायगी की है। आगे दाऊजी महाराज जानें।
क्रमशः
समाचार
चार साल बाद भी दाऊजी मंदिर के खाते में जमा नहीं हुए 13.5 लाख रुपये; किसके पास है दाऊजी महाराज की अमानत? प्राप्ति रसीद के लिए भटक रहा दाता
- by admin
- April 16, 2026
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- 2 hours ago












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