जयपुर।
‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता’ को देव-वाक्य मानने वाले हमारे समाज में बेटियां सदियों से उपेक्षा का शिकार होती आ रही हैं। हालांकि, अपने खिलाफ तमाम रूढ़ियों में जकड़ीं होने के बावजूद बेटियों ने बड़ी-बड़ी कामयाबियां हासिल कर समाज को अपनी सोच बदलने को बाध्य कर दिया है। इस बदलाव का सूत्रपात हो चुका है, और यह बदलाव होकर रहेगा। इसकी तस्दीक जयपुर के एक प्रतिष्ठित कलचुरी परिवार ने बड़े अनोखे तरीके से की है, जिसकी इन दिनों खासी चर्चा है।

जयपुर के वैशालीनगर निवासी प्रतिष्ठित गुप्ता (कलचुरी) परिवार ने चौथी पीढ़ी में बेटी का जन्म होने पर परदादा-परदादी बने श्री नंदलाल गुप्ता एवं श्रीमती मोती देवी को बड़े धूमधाम से ‘सोने की सीढ़ी’ चढ़ाने की रस्म अदा की। जबकि, ‘स्वर्ण-सीढ़ी आरोहण’ की यह परिपाटी अब तक चौथी पीढ़ी में बेटे के जन्म पर ही निभाई जाती रही है। दावा किया जा रहा है कि कलचुरी समाज में पहली बार बेटी के जन्म पर ‘स्वर्ण सीढ़ी आरोहण’ कराया गया है। गुप्ता परिवार की इस पहल ने समाज को मजबूत संदेश दिया है कि बेटे को घर का चिराग मानते हैं तो बेटी को भी घर की ज्योति माना जाना चाहिए, जो दो परिवारों को रोशन करती है।
वैशालीनगर में ‘पीएनटी कालोनी, शांतिनगर’ निवासी श्री केएन गुप्ता (दूरदर्शन वाले) और श्रीमती यशवंत गुप्ता के यहां बीती 27 फरवरी को पौत्री कृषा (पुत्री श्री निशांक गुप्ता एवं श्रीमती प्रिया गुप्ता) का जन्म हुआ जिसके उपलक्ष्य में नवरात्र की अष्टमी 26 मार्च को उन्होंने अपने माता-पिता यानी कृषा के परदादा-परदादी श्री नंदलाल गुप्ता और श्रीमती मोती देवी का ‘स्वर्ण-सीढ़ी आरोहण’ समारोह बड़ी धूमधाम और भव्यता के साथ आयोजित किया। बिटिया कृषा के ननिहाल धनिष्ठा परिवार ने समारोह में बड़े उत्साह से भागीदारी कर इस पहल का पुरजोर समर्थन किया। नवजात कृषा के परनानाजी श्री कन्हैयालाल धनिष्ठा, नाना श्री घनश्यान धनिष्ठा लवाणवाले (अहमदाबाद), बड़े नाना कैलशचंद्र धनिष्ठा (जयपुर), छोटे नाना रामऔतार धनिष्ठा और राजेश धनिष्ठा ‘आईआरएस’ (फरीदाबाद) ने सभी परिवारीजनों के साथ समारोह में शिरकत की और अपनी नवजात धेवती के परदादा-परदादी के सम्मान में दिल खोल दिया। कार्यक्रम में पहुंचे कलाल समाज धर्मशाला अजमेर के संरक्षक जेएस मेवाड़ा (केकड़ी), विजय कटारा, लोकेश जायसवाल, राम मनोहर गुप्ता, अशोक मेवाड़ा, राकेश सेठी, ओमप्रकाश जायसवाल, विनोद जायसवाल समेत प्रतिष्ठित समाजबंधुओं ने इस अदभुत पहल के लिए परिवार को बधाई दी।
गुप्ता परिवार की बेटी श्रीमती मीनू गुप्ता जायसवाल (दिल्ली) ने शिवहरेवाणी को बताया कि कलचुरी समाज में संभवतः पहली बार ऐसा हुआ है, जब चौथी पीढ़ी में बेटी के जन्म पर परदादा-परदादी को सोने की सीढ़ी चढ़ाया गया। इसका उद्देश्य समाज को यह संदेश देना है कि वंश केवल पुत्रों से नहीं, बल्कि सुशिक्षित और समर्थ पुत्रियों से भी आगे बढ़ता है। एक बेटी होने के नाते उन्हें अपने परिवार की इस पहल पर गर्व है। श्रीमती मीनू ने बताया कि उनके परिवार में बेटे-बेटी के बीच कभी भेद नहीं रखा गया। उनके पिता श्री नंदलाल गुप्ता ने उन्हें भी बेटों के बराबर उच्च शिक्षा दिलाई, जिसके चलते वह राष्ट्रीय राजधानी में आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं, पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर बिजनेस संभालती हैं। परिवार से मिली अच्छी शिक्षा और संस्कारों का ही फल है कि वह सामाजिक सेवाकार्यों में भागीदारी को अपनी जिम्मेदारी समझती हैं, परिवार से मिली शिक्षा की वजह से ही वह आज ‘जायसवाल जागृति’ पत्रिका की संपादक हैं, और समाज के कार्यक्रमों का मंच संचालन कुशलता से कर पाती हैं।
