चित्तौड़गढ़।
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार क्षेत्र के गुर्जर बाहुल्य गाँव ‘दोला जी का खेड़ा’ में एक कलार (सुहालका) परिवार को खाप पंचायत के फरमान के चलते पिछले तीन महीने से सामाजिक बहिष्कार झेलना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि गांव का कोई व्यक्ति उनसे बात नहीं करता, परिवार को अपनी किराने की दुकान बंद करनी पड़ी जो उनकी आजीविका का एकमात्र साधन थी।
इस पीड़ित परिवार के मुखिया हैं सत्यनारायण सुहालका, जो अपनी पत्नी, दो बच्चों और मां के साथ गांव में रहते हैं। उन्होंने बताया कि बीती 29 मार्च को गांव वालों ने उनके परिवार बहिष्कार कर दिया, तब से कोई भी उनसे और उनके परिवार के किसी भी सदस्य से बातचीत और व्यवहार नहीं रख रहा है। गांव में उनकी किराने की दुकान से लोगों ने सामान लेना भी बंद कर दिया, लिहाजा उन्हें दुकान बंद करनी पड़ी। श्री सुवालका ने बताया कि हाल ही में उनके परिवार में एक विवाह समारोह था तो उसमें आए रिश्तेदारों को गांव वालों ने धमकाया। यहां तक कि ढोल वालों तक को इस मांगलिक कार्यक्रम में आने से रोक दिया गया। सुहालका कहना है कि 80 परिवारों के इस गांव में अधिकांश गुर्जर परिवार ही हैं जिसके कारण दूसरे समुदाय के लोग कुछ कह नहीं पाते हैं।
दरअसल, सत्यनारायण सुहालका ने कुछ समय पहले भीलवाड़ा निवासी एक व्यक्ति से गांव में एक जमीन खरीदी थी, बस यही उनका ‘अपराध’ हो गया। सुवालका ने बताया कि जमीन खरीदने के बाद जब उन्होंने इसकी तारबंदी कराना शुरू किया तो इस जमीन के प्रथम स्वामी सोहन पुत्र मांगीलाल गुर्जर अन्य लोगों के साथ आ धमके और इस जमीन को चारागाह भूमि बताते हुए अपना कब्जा होने का दावा किया। उनकी बात नहीं मानने पर उन्होंने सुवालका परिवार के खिलाफ चारागाह-भूमि पर अतिक्रमण करने की शिकायत दर्ज करवा दी।
शिकायत पर नायब तहसीलदार कार्यालय से अधिकारी मौके पर पहुंचे। सुवालका परिवार ने अधिकारियों के सामने दलील रखी कि इस भूमि पर एक जनप्रतिनिधि और कुछ अन्य लोगों के निर्माण पहले से हैं, लिहाजा सबके निर्माण एकसाथ हटाए जाने चाहिए। सुवालका ने बताया कि उस समय तो अधिकारी बिना कार्रवाई किए लौट गए लेकिन बाद में प्रभावशाली लोगों के निर्माण को नजरअंदाज कर केवल उनके परिवार के निर्माण को हटवा दिया। सुवालका परिवार ने जब इस भेदभाव का विरोध किया, तो सोहन गुर्जर ने दबाव बनाने लिए खाप पंचायत से परिवार के सामाजिक बहिष्कार का फरमान जारी करवा दिया।
सत्यनारायण सुवालका ने बहिष्कार की शिकायत तहसीलदार को दी थी तो उन्होंने उनके क्षेत्राधिकार के बाहर का मामला बताते हुए नायब तहसीलदार को सूचना देने को बोला। इसके बाद सत्यनारायण ने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। उनका कहना है कि पुलिस पहले दो-तीन दिन तक रिपोर्ट दर्ज करने में टालमटोली करती रही. काफी कोशिशों के बाद 16 जून को पुलिस ने परिवाद दर्ज कर लिया। पुलिस का कहना है कि वह वास्तविकता की जांच कर रही है। वहीं सत्यनारायण सुवालका कहना है कि कोई भी पंचायत किसी परिवार को सामाजिक रूप से बहिष्कृत नहीं कर सकती है, ऐसा होने पर पंचायत सदस्यों पर मुकदमा दर्ज कर सजा दिलानी चाहिए लेकिन इस मामले में प्रशासन और पुलिस दोनों ही चुप है।
(मीडिया रिपोर्ट से इनपुट)
शर्मनाकः चितौड़गढ़ में तीन महीने से सामाजिक बहिष्कार झेल रहा है एक कलाल परिवार; नियम-कानून से बेखौफ खाप पंचायत
