July 31, 2026
शिवहरे वाणी, D-30, न्यू आगरा, आगरा-282005 [भारत]
समाचार

दुखदः आगरा के वयोवृद्ध समाजसेवी श्री सुरेशचंद्र शिवहरे नहीं रहे

आगरा। 
शिवहरे समाज के वरिष्ठ समाजसेवी एवं शिवहरेवाणी के प्रवर्तक श्री सुरेशचंद्र शिवहरे नहीं रहे। वह 80 वर्ष के थे । शुक्रवार (30 सितंबर) सुबह करीब साढ़े सात बजे अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने पर परिजन उन्हें कामायनी अस्पताल ले गए जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सायं चार बजे कैलाश स्थित श्मशानघाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। 
श्री सुरेशचंद्र शिवहरे के निधन के समाचार पर उन लोगों को सहसा विश्वास न हुआ, जिन्होंने बीते पितृपक्ष में उनकी पत्नी स्व. श्रीमती कुसुम (रुक्मणी देवी) शिवहरे के श्राद्ध पर उनसे मुलाकात की थी। तब वह पूरी तरह स्वस्थ लग रहे थे, और सभी लोगों से गर्मजोशी के साथ अच्छी तरह मिले थे। श्री सुरेशचंद्र शिवहरे ने पर्यटन व्यवसाय अपनी खास पहचान बनाई थी। वह हिंदी अंग्रेजी के अलावा आठ विदेशी भाषाओं के ज्ञाता थे, जिसके चलते कारोबार में प्रगति कर आगरा के चारों प्रमुख स्मारकों ताजमहल, किला, सिकंदरा और एत्माददौला में अपने इंपोरियम स्थापित किए। उन्होनें सरकारी ठेकेदार के रूप में पीडब्लूडी के लिए 43 वर्षों तक कार्य किया। लोहे और वाइन के कारोबार में भी सफलता अर्जित की। और, बाद में रीयल एस्टेट का कारोबार भी किया। उन्होंने अपने व्यवहार और ज्ञान-कौशल से हर क्षेत्र में सफलता अर्जित की।
सामाजिक जीवन में उन्होंने अपने अग्रज स्व. श्री जौहरीलाल शिवहरे (दाऊजी मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष) के आदर्शों का पालन किया। आगरा में शिवहरे समाज की दोनों धरोहरों मंदिर श्री दाऊजी महाराज और राधाकृष्ण मंदिर की प्रबंध समितियों में उन्होंने विभिन्न पदों पर रहते हुए सामाजिक कार्यों में योगदान किया। दोनों मंदिरों के पुनर्निर्माण कार्य में उन्होंने तन, मन और धन से अपना योगदान किया। बढ़ती उम्र में सेहत संबंधी समस्याओं के बावजूद समाज में गतिविधियों में शरीक रहते हैं।  समाज के प्रति उनका लगाव ही था कि शिवहरेवाणी के उन्न्यन में आगे बढ़कर योगदान किया, जिसके लिए शिवहरेवाणी ने आभार स्वरूप उन्हें सम्मानित किया था। 
धर्म के प्रति भी श्री सुरेशचंद्र शिवहरे का विशेष लगाव था, खासकर कैलाश महादेव मंदिर के वह परम सेवकों में माने जाते थे। मंदिर के हर आयोजन में उनकी और उनके परिवार की भूमिका रहती है। कैलाश घाट स्थित श्मशान घाट के पुनरुद्धार कार्य में भी उनके परिवार के द्वारा कराया गया है।

 

 

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