by Som Sahu July 20, 2017 घटनाक्रम 723
- बैतूल के मुलताई में अपने आवास पर लगाई फांसी
- मध्य प्रदेश कांग्रेस के पूर्व उपाध्य व प्रवक्ता रह चुके थे
- अंतिम संस्कार में उमड़े लोग, नम आंखों से दी विदाई
शिवहरे वाणी नेटवर्क
बैतूल।
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री अजय शिवहरे ने यहां मुलताई स्थित अपने आवास पर फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। सीधे, सरल स्वभाव के धनी अजय शिवहरे के निधन से लोग स्तब्ध रह गए। उनहें सहस विश्वास नहीं हो पा रहा था हमेशा मुस्कराते हुए गर्मजोशी से मिलने वाला एक शख्स ऐसा कदम भी उठा सकते हैं। अजय शिवहरे मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे और पार्टी के प्रदेश पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष के साथ ही प्रदेश प्रवक्ता भी रह चुके थे। दो साल पहले ही वह भोपाल से आकर बेतूल में बसे थे और इतने कम समय में उन्होंने यहां के लोगों मे गहरी पैठ बना ली थी।
फिलहाल आत्महत्या के कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है, पुलिस मामले की जांच कर रही है। नजदीकी सूत्रों के अनुसार वह कुछ समय से आर्थिक कारणों को लेकर भारी तनाव में थे । हालांकि मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। खास बात यह है कि अजय ने फांसी लगाने से पूर्व फेसबुक एकाउंट पर अपना कवर फोटो बदला था। बदले गए कवर फोटो में उन्होंने लिखा कि निभाओ किरदार इस तरह कि पर्दा गिरे पर तालियां बजती रहें। कवर फोटो के स्लोगन से भी लगता है कि वह भारी तनाव में थे और आत्महत्या का मन बना चुके थे।
अजय शिवहरे मूल रूप से भोपाल के रहने वाले थे लेकिन दो साल पहले ही बेतूल के मुलताई में आकर बसे थे। मुलताई में बैतूल रोड अंबेडकर वार्ड में उनका आवास है जहां वे पत्नी श्रीमती सुनीता शिवहरे और दो पुत्रियां व एक पुत्र के साथ रहते थे। अजय शिवहरे ने मंगलवार (18 जुलाई) की शाम करीब 4.30 बजे यह आत्मघाती कदम उठाया, जब उनकी पत्नी श्रीमती सुनीता शिवहरे बाजार गई हुई थीं, और बच्चे स्कूल गए थे। श्रीमती सुनीता शिवहरे जब बाजार से वापस आई तो बेडरूम का दरवाजा भिड़ा हुआ था जिससे पता नहीं चला कि अंदर क्या हुआ है। कुछ ही देर में जब बच्ची बेडरूम में स्कूल बैग रखने गई तो उसकी चीख निकल गई। पापा अजय शिवहरे पंखे से दुप्पटा बांधकर फांसी पर लटके थे। अजय के कदम से बेसुध सुनीता शिवहरे ने बताया कि वे कर्ज को लेकर कुछ समय से परेशान चल रहे थे, लेकिन वे ऐसा आत्मघाती कदम उठाएंगे, इसका बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था।
अजय शिवहरे का अंतिम संस्कार बुधवार (19 जुलाई) को बेहद गमगीन माहौल में किया गया। बड़ी संख्या मे शहर के लोगों और कांग्रेसजन व अन्य राजनीतिक दलों के लोग भी उन्हें अंतिम विदाई दी। हरदम हंसते रहने वाले, मिलनसार शख्सियत को अंतिम विदाई के समय हर चेहरे पर मायूसी थी, हर आंख नम थी।










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