शिवहरे वाणी नेटवर्क
नरसिंहपुर।
मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर की एक बेटी ने भूटान में हुई ओपन इंटरनेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप में गोल्ड मैडल हासिल कर अपने परिवार, समाज, नगर और देश को गौरवान्वित किया है। करेली नगर के प्रतिष्ठित राय (कलचुरी) परिवार की बेटी मुस्कान कटकवार ने अपने भारवर्ग में कोई भी मुकाबला नहीं गंवाया। मुस्कान की इस उपलब्धि पर नरसिंहपुर जिले के डीएम दीपक सक्सेना ने उसके परिजनों को बधाई दी है। वहीं मुस्कान के एमआईएमटी कालेज के प्रिसिपल ने उसकी पूरी फीस माफ करने की घोषणा कर दी। कलार महिला मंडल की जिलाध्यक्ष श्रीमती मनीषा राय ने कहा कि मुस्कान के लौटने पर नरसिंहपुर में उसका जोरदार स्वागत किया जाएगा।
मुस्कान अभी भूटान के फुनतशुलिंग शहर में ही हैं, जहां 28-29 जनवरी को यह इंटरनेशनल चैंपियनशिप हुई थी। इस स्पर्धा में भारत के अलावा कई अन्य देशों के खिलाड़ियों ने भाग लिया था। खास बात यह है कि मुस्कान कटकवार को बीती 26 जनवरी को नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह में राजपथ पर हुई परेड मे भाग लेना था, लेकिन स्पर्धा चलते वहां नहीं जा पाईं। अब मुस्कान की इच्छा है कि अगले वर्ष गणतंत्र दिवस पर इस परेड में हिस्सा जरूर बनें।
करेली में गुड़ व्यवसायी राजकुमार कटकवार एवं पत्रकार श्रीमती संगीता कटकवार की 18 वर्षीय पुत्री मुस्कान बीकॉम फर्स्ट ईयर की स्टूडेंट हैं। एनसीसी की कैडेट के रूप मे कई सर्टिफिकेट हासिल कर चुकी हैं। मुस्कान ने इंडियन आर्मी में शामिल होकर देश की सेवा करने का लक्ष्य तय किया है, और इसके लिए तैयारी भी कर रही है।
मुस्कान ने पिछले वर्ष गोवा में हुई नेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप में भी गोल्ड जीता था। इसी साल अक्टूबर में श्रीलंका में होने वाली एक और इंटरनेशनल चैंपियनशिप में उसे भारत का प्रतिनिधित्व करना है। मुस्कान बहुमुखी प्रतिभा की धनी है। वह अच्छी वक्ता हैं और जिला एवं मंडल स्तर तक की कई वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में अवार्ड जीत चुकी है। वह सिंगिंग का हुनर भी रखती हैं। संगीता कटकवार ने शिवहरे वाणी को बताया कि बेटी ने उनके परिवार का मान बढ़ाया है, आज मेरी होनहार बेटी मेरी सबसे बड़ी पहचान बन गई है।
ऐसे दौर में, जब लड़कियों के साथ भेदभाद के मामले आएदिन सामने आते हैं, तमाम सख्ती और कोशिशों के बाद भी कन्या-भ्रूण हत्या पर पूरी तरह रोक नहीं लग पा रही है, मुस्कान की सफलता बताती हैं कि बेटियां किसी भी मामले में बेटों से कम नहीं हैं, जरूरत इस बात की है कि हम बेटों की तरह बेटियों को भी पढ़ाएं-लिखाएं, उनकी अभिरुचि और प्रतिभा को आगे बढ़ाएं…और, गर्व से कहें-मेरी बेटी, मेरा अभिमान।
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