प्रयागराज। प्रयागराज में कलघर स्थित जायसवाल धर्मशाला में जायसवाल समाज के सामूहिक विवाह समारोह की पूर्वसंध्या गीत-कविता-गजलों के नाम रही। देशभर से कलचुरी समाज के प्रतिष्ठित कवियों और शायरों ने अपनी-अपनी रचनाएं पेश कीं। कवियों ने जहां अपनी ओज, श्रृंगार और हास्य रस में छंदबद्ध रचनाओं से श्रोताओं को बांधे रखे, वहीं मौजूदा दौर में आम आदमी के मुश्किलों पर संजीदा अशआर कहे।
कवि सम्मेलन की अध्यक्षता यूपी के बरेली से आए जाने-माने शायर विनय ‘सागर’ जायसवाल ने की। तमाम नवोदित कवि-शायरों के उस्ताद विनय ‘सागर’ जायसवाल ने मौजूदा दौर में ‘सिस्टम की साजिश’ का इशारा देती गजल कहीः-
खबर हो तुझको मेरा बुत तराशने वाले,
खड़ें है लोग मुझे फिर से मारने वाले
मैं उस मुकाम पर सदियों खड़ा रहा कैसे,
जहां खड़े थे मेरा सिर उतारने वाले
सोशल मीडिया पर खूब पढ़े जाने वाले विनय ‘सागर’ जायसवाल यह भी कहते हैः-
ग़र यह गुमान होता कि रहबर रकीब़ होंगे
राहों में रोक लेता रफ्तार कारवां की
वहीं सागर (मध्य प्रदेश) से आए मंच के लोकप्रिय कवि वृंदावन राय ‘सागर’ ने अपने लोकप्रिय अशआर पढ़े। जीने का सलीख़ा सिखाती उनकी एक गजल का मतला खूब सराहा गयाः-
मुश्किलों में मुस्कराना चाहिए,
यह हुनर हम सबको आना चाहिए,
जिंदगी में मयस्सर हो रोशनी
हाथ पर सूरज उगाना चाहिए।
कवि सम्मेलन के संयोजक सीहोर (मध्य प्रदेश) से आए वरिष्ठ कवि सुरेश जायसवाल ने अपनी रचना बेटियों को समर्पित कीः-
रण में चंडी का अवतार बेटियां
असुर वध मे शेर पे सवार बेटियां
इसी क्रम में पिपरिया (म.प्र.) से आए ओज के सशक्त हस्ताक्षर राजेश जायसवाल ने महाराणा प्रताप पर अपनी लोकप्रिय रचना पढ़ीः-
घास की रोटी सकती थी या
मातृभूमि की भक्ति थी
समर ने जिसको बांध लिया था
अम्बर से अग्नि टपकती थी
भोपाल से आईं श्रृंगार की कवियत्री सीमा शिवहरे ने मौजूदा दौर में एक कवि की जिम्मेदारी को ओज की इन पंक्तियों के माध्यम से व्यक्त किया-
मेरा विश्वास कहता है कलम को खंजर बना लूंगी
मैं इक दिन आसमां चीरूंगी अपना घर बना लूंगी
दारानगर (कोशांबी) से आए श्रृंगार के कवि सुनील कुमार ‘सरस’ ने गीत प्रस्तुत कियाः-
धड़कनों में बस गए हो तो सुनो इक बात मेरी
नब्ज बनकर जिस्म में मेरे हमेशा तुम धड़कना
संतों की केसरिया पोशाक में मंच पर सबसे अलग नजर आ रहे संतकवि ओमकार दास (भिलाई) ने बेटियों की व्यथा को शब्द दिएः
गजब खेलता खेल विधाता बेटी पैदा करके
बीते जीवन उस बेटी का आहें भरते-भरते
इंदौर से पहुंचे श्रृंगार और हास्य के युवा हस्ताक्षर, कवि गोपाल जायसवाल ‘मनहर’ ने मात्रा-बिंदी का ध्यान रखते हुए छंद-बद्ध रचना प्रस्तुत कीः-
नित भरते शब्दों की गागर
भावों के हम सागर से
कभी चंद्र को निखते हैं हम
बातें करें दिवाकर से
सिद्धार्थनगर (यूपी) की नवोदित कवियत्री सुश्री अपर्णा जायसवाल ‘अविरल’ ने देशभक्ति के भावों से परिपूर्ण वीर रस की कविता प्रस्तुत कीः-
वीरों के अमिट बलिदानों से भारत की माटी चंदन है।
देव, ऋषि, मुनियों की धरती हम करते इसका वंदन हैं।
कवि सम्मेलन में सुनील जगदलवी (छत्तीसगढ़), अजय जायसवाल (अमेठी), गजलराज (बरेली, यूपी), शोभाराम सिहारे (ललितपुर), डा. शशि जायसवाल और अर्चना जायसवाल (वाराणसी) ने भी अपनी-अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। संचालन कौशांबी के युवा कवि सुजीत जायसवाल ‘जीत’ ने किया। कलचुरी कवियों के इस सम्मेलन में कुछ अतिथि कवियों की उपस्थिति भी महत्वपूर्ण रही। पुलिस कॉप के रूप में प्रयागराज में सेवाए दे रहीं श्रीमती मुक्ता मिश्रा इस शाम कवियत्री के रूप में कलचुरी मंच पर नमूदार हुईं। उन्होंने बेटियों के भावों को ओज के स्वर दिए, वहीं प्रयागराज के मकबूल कवि एमएस खान ने पढ़ा-‘पुलिस बिल्कुल मत घबराना’। एमएस खान की इस गजल को खूब दाद मिलीः-
भरी बरसात में कैसे कहूं सावन नहीं भीगा
किसी का तन नहीं भीगा किसी का मन नहीं भीगा
आधी रात तक चले कवि सम्मेलन के बाद राष्ट्रीय कलचुरी एकता महासंघ की राष्ट्रीय संयोजिका श्रीमती अर्चना जायसवाल और राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री शिवचरण हाडा (जयपुर) ने सभी कवियों को सम्मानित किया। जायसवाल समाज प्रयागराज के टीएन जायसवाल, कमलेंद्र जायसवाल, सुधीर जायसवाल, मोहित जायसवाल, श्यामलाल शिवहरे समेत सभी पदाधिकारी भी मौजूद रहे। राष्ट्रीय कलचुरी एकता महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री किशोर राय (नरसिंहपुर), शिवहरेवाणी के संपादक सोम साहू (आगरा), वरिष्ठ पदाधिकारी राजेश राय (उज्जैन), पंकज मेवाड़ा (भीलवाड़ा), डॉली मालवीय (भोपाल), कल्पना गुप्ता एडवोकेट (पटना), केके जायसवाल (दिल्ली) की उपस्थिति महत्वपूर्ण रही। संभवतः यह पहला ऐसा अवसर रहा होगा जब कलचुरी समाज के इतने सारे कवि एक मंच पर एकसाथ उपस्थित हुए और अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। इस शानदार पहल के लिए हिंदी-उर्दू साहित्य की सिरमौर नगरी प्रयागराज से बेहतर जगह कोई और हो भी नहीं सकती थी।
वृंदावन राय सरल की 17वीं पुस्तक का विमोचन
कवि सम्मेलन के दौरान सागर के वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि श्री वृंदावन राय ‘सरल’ की पुस्तक ‘आधुनिक युग के दोहे’ का विमोचन किया गया। श्री वृंदावन राय सरल की यह 17वीं कृति है। इस पुस्तक में कई मौजूदा कवियों के दोहों को संकलित किया गया है।








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