नई दिल्ली।
एक जाति, तीन पहचान (कलवार, कलाल, कलार), सैकड़ों उपवर्ग और उपनाम (सरनेम)। देश की अनुमानित दस फीसदी आबादी वाले सबसे बड़े ओबीसी समाज के लोग आगामी जातिगत जनगणना में जाति के कॉलम में आखिर क्या लिखें जिससे समाज की सटीक जनसंख्या और स्थिति सामने आ सके। दिल्ली में फेडरेशन ऑफ इंडियन कलचुरी एसोसिएशन्स ‘फिका’ (FIKA) की नेशनल काउंसिल की बैठक में इस सवाल पर गहन मंथन के बाद भी इस पर फिलहाल किसी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंच जा सका है। बैठक में समाज की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने और एकजुटता कायम करने के लिए आगामी दिलों में ‘राजनीतिक चेतना रैलियों’ के आयोजन पर एक सहमति बनी है।

गत 17 मार्च को दिल्ली में रफी रोड स्थित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब के उपसभापति कक्ष में हुई फिका की नेशनल काउंसिल की मीटिंग में अध्यक्ष व्ही. कुमार गौड़ ने पॉवर प्वाइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से विस्तार से बताया कि हमारे समाज के लोग अलग-अलग राज्यों में किस नाम से जाने जाते हैं, और कहां-कहां पिछड़े वर्ग में सम्मिलित हैं। इससे पूर्व अखिल भारतवर्षीय हैहय कलचुरी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयनारायण चौकसे (चेयरमैन, एलएनसीटी ग्रुप, भोपाल) ने अपने प्रारंभिक उदबोधन में कहा कि मध्य प्रदेश समेत कुछ अन्य राज्यों में हमें कलार नाम से जाना जाता है, राजस्थान औऱ कई अन्य राज्यों में कलाल औऱ महाराष्ट्र समेत कुछ क्षेत्रों में कलवार नाम से जाना जाता है। इन तीनों को मिलाकर एक पहचान के तौर पर कलचुरी शब्द का प्रयोग किया जाना चाहिए। इस पर तमाम चर्चा के बाद केंद्रीय गृहराज्यमंत्री श्रीपद नायक ने कहा कि आम सहमति से ही किसी एक नाम को अंतिम निर्णय लिया जाएगा, इसके लिए कई स्तरों पर विमर्श करना होगा।

2027 में वाराणसी में होगी रैली
बैठक में कहा गया कि आबादी के अनुपात से देखें तो लोकसभा में 70 सांसद हमारे समाज के होने चाहिए। लेकिन, दुर्भाग्य से लोकसभा में हमारे सांसदों की संख्या बढ़ने के बजाय लगातार घट रही है। 2014 में हमारे 19 सांसद थे, जो 2017 में घटकर 17 हो गए और 2024 में हमारे सांस्दों की संख्या 13 ही रह गई। बैठक में तय किया गया कि राजनीति में समाज की भागीदारी बढ़ाने और समाज को राष्ट्रीय स्तर पर एकजुट करने के लिए राजनीतिक चेतना रैलियों का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने वर्ष 2027 में वाराणसी में समाज की एक बड़ी राजनीतिक चेतना रैली का आयोजन किया जाएगा। इसी तरह 2029 से पूर्व राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में यह रैली आयोजित की जानी चाहिए। इस प्रस्ताव पर सर्वसम्मति जाहिर करते हुए कहा गया कि इसकी तैयारी अभी से शुरू कर दी जानी चाहिए।

भोपाल में होगी फिका की अगली बैठक
बैठक का दूसरा सत्र राज्यमंत्री श्रीपद नायक के सरकारी बंगले में लंच के बाद शुरू हुआ। इस सत्र में जयनारायण चौकसे ने कहा कि हमारे आराध्य राजराजेश्वर भगवान श्री सहस्रबाहु अर्जुन की राजधानी रहे महेश्वर नगर को एक धार्मिक नगरी के रूप में पुनः विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं, जिसके लिए हाल ही में एक ट्रस्ट का गठन किया गया है। उन्होंने इसे लेकर तमाम योजनाओं की उन्होंने विस्तार से जानकारी दी। उनकी ओर से आगामी 1 व 2 अगस्त को भोपाल में फिका की बैठक करने क प्रस्ताव रखा गया, जिसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। उम्मीद की गई कि भोपाल में कई अहम मुद्दों पर निर्णय लिया जा सकता है।

इन्होंने भी किया संबोधित
बैठक में पांच बार के विधायक रहे तेलंगना के पूर्व मंत्री श्रीनिवास गौड़ (हैदराबाद), कर्नाटक के एम.व्ही कुटेश्वर, अखिल भारतीय जायसवाल सर्ववर्गीय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकिशोर पापा मोदी, संजय जायसवाल, जीसी जायसवाल, लक्ष्मण गौड़, राजेंद्र मेवाड़ा, राजन जायसवाल, हेमन्त कुमार मौड़, मदनलाल जायसवाल, आनंदू साहू, स्वामीनाथ जायसवाल और कार्यक्रम संयोजक शैलेंद्र कुमार जायसवाल एडवोकेट (महासचिव, अखिल भारतीय जायसवाल सर्ववर्गीय महासभा) ने भी संबोधित किया। अंत में सभी प्रदेशों से आए प्रतिनिधियों का स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। सभी प्रतिनिधियों ने राज्यमंत्री श्रीपद नायक को पुष्पगुच्छ भेंट किया और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया।
क्या है फिका और इसका लक्ष्य
भारतीय कलचुरी संगठनों के महासंघ ‘फेडरेशन ऑफ इंडियन कलचुरी एसोसिएशन्स‘ (फिका FIKA) का गठन सैकड़ों अलग-अलग उपवर्गों व उपनामों में विभक्त देश के सबसे बड़े पिछले वर्ग समुदाय (ओबीसी) कलचुरी समाज को एक पहचान दिलाने और एक छतरी के नीचे लाने के लिए किया गया था। इसके लिए फिका ने ‘एक राष्ट्र, एक समुदाय, एक चिह्न’ की तर्ज पर कलचुरी समाज का एक लोगो भी जारी किया था। आज फिका एक ऐसा प्लेटफार्म बन गया है जहां कलचुरी समाज के नेता, शीर्ष कारोबारी और बुद्धिजीवी एकसाथ मिलकर अपने लोगों के उत्थान के लिए काम करते है।
(कार्यक्रम संयोजक श्री शैलेंद्र कुमार जायसवाल एडवोकेट द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारियों पर आधारित)












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