आगरा।
इन दिनों देशभर में गणेशोत्सव की धूम है। जगह-जगह गणेशजी के भव्य पंडाल सजे हैं, घर-घर में गणपति की प्रतिमा स्थापित की गई है। आमतौर पर लोग गणेशजी की प्रतिमा बाजार से लाते हैं, लेकिन आगरा में एक शिवहरे परिवार ऐसा भी है जिसकी हुनरमंद बेटी पिछले सात साल से अपने हाथ से मिट्टी के गणेशजी तैयार कर उन्हें विधिवत स्थापित करती आ रही हैं।
ये हैं लोहामंडी की सुश्री दीपा गुप्ता, स्व. श्री बी.एस. गुप्ता की पुत्री और फोरेस्ट रेंजर श्री अमित गुप्ता गोल्डी की छोटी बहन। यूं तो उनके गणेशजी हर साल एक नई मुद्रा में होते हैं, लेकिन इस बार तो गणपति का स्वैग ही अलग है। एक पांव सिंहासन से लटका कर और दूसरे पांव को सिंहासन पर जमाकर पूरी ठसक से विराजमान हैं। तिरुपति बालाजी की थीम पर अदभुत श्रृंगार बप्पाजी को अलग स्वरूप दे रहा है। गणपति का यह सुंदर और दिव्य रूप सुश्री दीपा की डेढ़ महीने की मेहनत का सुखद परिणाम हैं।
सुश्री दीपा ने शिवहरेवाणी को बताया कि वह दस वर्ष से गणेशजी की स्थापना करती आ रही हैं, और सात वर्षों से अपने हाथ से मिट्टी के गणेशजी तैयार करती आ रही हैं। उन्होंने बताया कि पहली बार तो उन्होंने बहुत डरते हुए छोटे से गणपति बनाए थे, और फिर उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया और गणपति का आकार भी। उन्होंने बताया कि छोटे गणपति तो पूरी तरह मिट्टी से ही तैयार हो जाते थे, लेकिन अब बड़े बप्पा बनाने के लिए कुछ और भी जतन करने पड़ते हैं। पहले दूब की घास को गाठकर एक बेस स्ट्रक्चर तैयार किया जाता है और फिर उस पर चिकनी मिट्टी चढ़ाकर प्रतिमा बनाई जाती है।

सुश्री दीपा ने बताया कि प्रतिमा को सूखने के बाद उसमें चिकनाहट के लिए गुड़ का लेप चढ़ाया जाता है। इसके बाद प्रतिमा की घिसाई कर उसे चिकना किया जाता है और फिर स्प्रे पेंट से कलर चढ़ाते हैं। इसके बाद शुरू होता है गणपति का श्रृंगार जिसमें 15-20 दिन कड़ी मेहनत लगती है। इस बार गणपति का मुकुट, सूंड और कान आदि सभी श्रृंगार तिरुपति बालाजी की थीम पर किया गया है। दीपा चहकते हुए कहती हैं कि मां गौरा के आशीर्वाद से इस बार गणपति की ऐसी सुंदर छवि निकल कर आई है, कि सभी को मोह ले रही है।

बीते रोज गणपति दरबार में सुंदरकांड का आयोजन किया गया था जिसमें आस-पड़ोस के शिवहरे परिवारों की महिलाओं के अलावा ‘शिवहरे सशक्त महिला मंडल’ की अध्यक्ष श्रीमती कविता रवि गुप्ता भी अपनी टीम के साथ पहुंची थीं। सभी ने इस अदभुत क्रियेशन के लिए दीपा को बधाई दी। दीपा गुप्ता ने शिवहरेवाणी को बताया कि अपने हाथ से बप्पाजी की प्रतिमा तैयार करने के पीछे सबसे बड़ी प्रेरणा उनके बड़े भाई श्री अमित गुप्ता ‘गोल्डी’ से मिलती है, उन्हीं का सबसे बड़ा सहयोग भी रहता है। घर में गणपति महोत्सव का शुभारंभ दस वर्ष पूर्व उन्हीं के द्वारा किया गया।
दीपा का कहना है कि गणेश चतुर्थी के एक महीने पहले से घर में गणपति का माहौल बन जाता है। पटला पूजन से गणेश प्रतिमा का निर्माण शुरू होता है और हर कोई इसमें सहयोग में तत्पर रहता है, मम्मी श्रीमती लक्ष्मी गुप्ता हों या भाभी श्रीमती राधा गुप्ता, यहां तक कि भतीजे अथर्व और भतीजी मिष्टी भी पीछे नहीं रहते। यही नहीं, बप्पा के श्रृंगार के दौरान लोहामंडी की शिवहरे गली और शिवहरे फाटक की महिलाओं और युवतियों से राय और सुझाव लिए जाते हैं। इस बार तिरुपति बालाजी थीम पर श्रृंगार का सुझाव भी इसी तरह से आया।
इस बार गणेश उत्सव के लिए कई प्रोग्राम तैयार किए गए हैं। 22 सितंबर तक हर शाम प्रोग्राम होंगे, 23 सितंबर को भंडारे के बाद विसर्जन होगा। इस बार बच्चों ने गणेश लीला की दो विशेष प्रस्तुति तैयार की हैं। पहली कड़ी में भगवान गणेश के रिद्धि-सिद्धि संग विवाह के प्रसंग की नाट्य प्रस्तुति है, जबकि दूसरी कड़ी में कुबेर महाराज के यहां दावत में भगवान शिव व माता पार्वती की जगह उनके पुत्र भगवान गणेशजी के पहुंचने का प्रसंग है। 19 सितंबर को बच्चों की गणेशलीला होगी, और 20 सितंबर को झांकी व भजन संध्या का आयोजन होगा।

















