शिवहरे वाणी नेटवर्क ग्वालियर। रात में कभी बिजली गुल होने पर ऐसे घुप अंधेरे से आपका सामना जरूर हुआ होगा, जब हाथ को हाथ नहीं सूझता। हम बेचैन हो उठते हैं, टटोलते हुए रोशनी का उपाय तलाशते हैं… एहतियात से कि, जब तक एक कदम पूरी तरह जमाकर न रख लें, दूसरा कदम उठाने की हिम्मत नहीं कर पाते हैं। लेकिन, ऐसे भी लोग हैं जिन्हें अपनी पूरी जिदगी ऐसे ही अंधेरे में गुजारनी पड़ती है। दिन और रात का फर्क वे नहीं कर पाते। ग्वालियर की कलचुरी महिलाओं ने आत्मज्योति दृष्टिहीन आश्रम में रहने वाली ऐसी दृष्टिहीन बालिकाओं के इस दर्द को करीब से देखा और जाना। इन बालिकाओं ने अपनी सुनने-सूंघने और स्पर्श की शक्तियों को ही विकसित कर उन्हें अंधेरे से लड़ने का हथियार बना लिया है। नेत्रहीन होने की कोई हीनता उनमें नहीं है। वे खास तरीके से चीजों को पहचानती हैं, और उन चीजों को भी देख पाती हैं जो हमें दिन के उजाले तक में नजर नहीं आती। कलचुरी महिलाओं ने इन दृष्टिहीन बच्चियों को लंच बॉक्स और पानी की बोतलें वितरित कर उन्हें उम्मीद की रोशनी से रूबरू कराया, वहीं इन बच्चियों ने तबला और हारमोनियम की लय-ताल के साथ भजनों की मधुर तान छेड़कर बताया कि ईश्वर का विशेष आशीर्वाद उनके साथ है। ये भावुकता के ऐसे क्षण थे, कि जब हर आंख नम हो गई। इस दौरान संस्था की ओऱ से आश्रम को आटा, चावल, शक्कर और तेल भी दान किया गया। संस्था की अध्यक्ष श्रीमती संगीता गुप्ता, गायत्री शिवहरे, मीरा शिवहरे, रेनु शिवहरे, जुली शिवहरे, रजनी शिवहरे, कीर्ति गुप्ता, करुणा गुप्ता, आशा, गीता, स्वाति, स्वेता शिवहरे, डॉली महाजन आदि मौजूद रहे।
दृष्टिहीन बालिकाओं को मिला कलचुरी महिलाओं का साथ
