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आगरा में शिवहरे समाज को मिलेगी अपनी धरोहर…21 को होली मिलन में इसलिए आपका आगमन जरूरी

शिवहरे वाणी नेटवर्क
आगरा। 
पेड़ों से पुराने पत्ते झड़ने लगे हैं, शाखों पर नई कोंपलें फूट रही हैं। रंग-बिरंगे फूल प्रकृति का श्रृंगार कर रहे है। फिजा में मस्ती और उल्लास का रंग घुलने लगा है। जीवन से नीरसता जा रही है, मधुरता का संचार हो रहा है। मौसम के साथ इस तरह जीवन भी बदलता है, और इसी परिवर्तन का त्योहार है होली। आगरा के शिवहरे समाज के लिए इस बार होली एक और गौरवशाली परिवर्तन का गवाह बनने जा रही है। जी हां, शिवहरे समाज की प्रमुख धरोहर मंदिर श्री दाऊजी महाराज के नए परिवर्तित और भव्य स्वरूप के साथ आपका होली मिलन होने जा रहा है। 
आगरा में शिवहरे समाज का होली मिलन समारोह 21 मार्च को शाम 4 बजे से सदरभट्टी चौराहा स्थित मंदिर श्री दाऊजी महाराज में आयोजित किया गया है।। समाज की यह प्रमुख धरोहर बीते डेढ-दो वर्ष से पुनरुद्धार के दौर से गुजर रही थी और होली पर यह अपने अधिक उपयोगी और भव्य स्वरूप के समाज के सामने आएगी। समारोह मंदिर की नवनिर्मित दो मंजिला धर्मशाला में होगा। प्रथम तल के भव्य मंच पर रंगारंग कार्यक्रम होंगे जिसमें नृत्य मंडली द्वारा फूलों की होली प्रस्तुत की जाएगी। वृद्धजनों का सम्मान होगा। दूसरी मंडिल पर स्वादिष्ट भोजन की व्यवस्था की गई है। स्वादिष्ट ठंडाई और चंदन के लेप से आगंतुकों को स्वागत किया जाएगा। 
मंदिर श्री दाऊजी महाराज प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्री भगवान स्वरूप शिवहरे एवं मंदिर श्री राधाकृष्ण समिति के अध्यक्ष श्री अरविंद गुप्ता ने समाजबंधुओं से अधिक से अधिक संख्या में होली मिलन समारोह में भाग लेने की अपील की है। समाज की दोनों धरोहरों मे हर साल होली (दुलहड़ी) की शाम को अलग-अलग होली मिलन समारोह आयोजित होते रहे हैं। लेकिन बीते वर्ष पहली बार शिवहरे समाज का एक ही होली मिलन समारोह आयोजित करने की परंपरा शुरू हुई है। यह आयोजन मंदिर श्री राधाकृष्ण में हुआ था, लिहाजा इस बार मेजबानी मंदिर श्री दाऊजी महाराज प्रबंध समिति की है।
होली का त्योहार रंग लगा कर, भेदभाव मिटा कर आपस में गले लगने का संदेश देता है। समाज को एकजुट कर आपसी सौहार्द बढ़ाना ही होली मिलन समारोह का उद्देश्य है। इसीलिए बुजुर्गों से आशीर्वाद लिए बिना, दोस्तों से गले मिले बिना, छोटों को आशीर्वाद दिए बिना, और कुल मिलाकर…अपने समाज के होली मिलन समारोह में भाग लिए बिना कोई भी व्यक्ति अपनी होली को संपूर्णता नहीं दे सकता।
 

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