शिवहरे वाणी नेटवर्क
आगरा
आज मई का दूसरा रविवार है जिसे दुनियाभर में मदर्स डे के रूप में मनाया जाता है। मदर्स डे मनाने के पीछे कोई खास कहानी नहीं है। सबसे पहले अमेरिका वेस्ट वर्जिनिया में एना जॉर्विस नाम की एक महिला सामाजिक कार्यकर्ता ने माताओं और मातृत्व को सम्मान दिलाने के लिए इसे शुरू कराया था, जो कम ही समय में पूरी दुनिया में मनाया जाने लगा। नारी का सबसे सशक्त रूप एक मां का होता है, नारी के अंदर एक मां के रूप में जो शक्ति छिपी होती है, वह बाहर आने पर दुनिया को चौंका सकती है। आज मदर्स डे पर हम ऐसी ही एक मां की बात करने जा रहे हैं, जिसने अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए सिस्टम से संघर्ष किया, पुलिस की थ्योरी को गलत साबित कर खुदकुशी में दर्ज मामले को हत्या में तब्दील कराया और कातिल को कटघरे में खड़ा किया। यह हैं भिंड की किरण शिवहरे।
श्रीमती किरण शिवहरे भिंड जिले के दबोह में रहती हैं। उनके पति काफी समय पहले साधु बनकर घर परिवार छोड़ चुके हैं। एक बेटी थी गोल्डी शिवहरे, जिसे आईटीआई कराने के लिए उन्होंने ग्वालियर भेज दिया था। 17 वर्षीय गोल्डी ग्वालियर के महाराजपुरा थाना क्षेत्र में बीएसएफ कालोनी में मां किरण की मौसी के घर पर रहकर पढ़ाई कर रही थी। बीते वर्ष 1 अप्रैल की रात को गोल्डी के दो बैचमेट्स दीपक और हरिओम उससे मिलने आए। इसी दौरान गोल्डी की हालत बिगड़ गई और दोनों लड़के वहां से भाग निकले थे। घर में केवल नानी थीं, जिन्होंने गोल्डी को किसी तरह अस्पताल पहुंचाया। अगली सुबह किरण ग्वालियर पहुंच गई। लेकिन गोल्डी को बचाया नहीं जा सका। पुलिस इस मामले को सुसाइड मान रही थी। घर से सल्फास की डिब्बी भी मिली थी। उसका कहना था कि गोल्डी ने अपनी मां की डांट से क्षुब्ध होकर जहर खाया था। जबकि, गोल्डी के हाथ व पैर में चोट के निशानों से साफ लग रहा था कि मौत से पहले उसके साथ हाथापाई भी हुई होगी।
लेकिन, किरण लगातार मामले को उठाती रही, और अपने अकेले दम पर पुलिस और प्रशासन में विभिन्न स्तरों पर पुरजोर तरीके से अपनी बात रखी कि मेरी बेटी ने खुदकुशी नहीं की, उसकी हत्या की गई है। किरण ने जो कहानी बताई, उसके मुताबिक हरिओम से गोल्डी प्रेम करती थी। सगाई की बात भी चली लेकिन दस लाख मांगने के चलते रिश्ता नहीं हो पाया था। घटना से डेढ महीने पहले हरिओम ने कॉलेज कैंपस में गोल्डी के साथ मारपीट की और पिस्टल भी अड़ा दी थी। गोल्डी इस दुर्व्यवहार से परेशान रहने लगी थी। इस बीच कालेज के ही दीपक से उसकी दोस्ती हुई लेकिन दीपक भी उसे प्रताड़ित करने लगा। परेशान गोल्डी अब दोनों से दूर रहना चाहती थी। हरिओम और दीपक दोनों गोल्डी पर अपना हक बता कर एक से दोस्ती बनाए रखने और दूसरे से तोड़ देने का दबाव उस पर बना रहे थे।
किरण पांच महीने जद्दोजहद के बाद अगस्त 2017 में अपने बेटी की मौत के मामले मे हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराने में कामयाबी हुईं। किरण की पुरजोर पैरवी के चलते पहले खुदकुशी का मामला मान रही पुलिस को अपनी ही बात को खारिज कर हरिओम के खिलाफ आत्महत्या के लिए प्रेरित करने की धारा 306 के तहत केस दर्ज करना पड़ा। हालांकि दीपक की कोई भूमिका नहीं मानी गई। यदि किरण शिवहरे ने गोल्डी को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष न किया होता तो उसकी मौत महज एक खुदकुशी बनकर रह जाती। किरण ने बेटी को न्याय दिलाने के लिए अकेले दम पर लड़ी इस जंग से मां प्रतिष्ठा को और सम्मानित किया है।