शिवहरे वाणी नेटवर्क
आगरा।
धरोहर राष्ट्र की हो, देश की, समाज की या फिर परिवार की, वे हमारी जिम्मेदारी हैं। कहा भी गया है कि, किसी व्यक्ति या समाज का अपनी धरोहर से संबंध उसी प्रकार का है, जैसे एक बच्चे का अपनी मां से संबंध होता है। हमारी धरोहर हमारा गौरव है और इसे भविष्य में आने वाली पीढि़यों के लिए बचाना तथा इसका संरक्षण करना हम सबकी जिम्मेदारी है।
आगरा में शिवहरे समाज की प्रमुख धरोहर मंदिर श्री दाऊजी महाराज इन दिनों संरक्षण एवं पुनरुद्धार की प्रक्रिया से गुजर रहा है। समाज की इस सवा सौ साल पुरानी धरोहर का संरक्षण एवं पुनरुद्धार इस प्रकार किया जा रहा है, कि इसका मौजूदा स्वरूप एवं कलात्मकता बरकरार रहे, साथ ही आधुनिक दृष्टिकोण के हिसाब से और अधिक उपयोगी साबित हो।
मुख्य मंदिर के स्वरूप से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है, संपूर्ण कार्य मंदिर के हॉल और धर्मशाला के हिस्से में किया जा रहा है। बीते दिनों गोवर्धन पूजा के दौरान इस निर्माण की पहली झलक समाज के लोगों को मिलीं, तो मंदिर में इतना स्पेस देख हर कोई चकित रह गया।
एक बड़ी दुविधा लोहे की उस जाली के इस्तेमाल को लेकर थी, जो हॉल की बालकनी की रैलिंग में लगी थी। ढलवां लोह की इस जालीदार रैलिंग की खास बात यह है कि सौ साल बाद भी इसमें जंक नहीं लगी है, और ना ही किसी प्रकार का नुकसान हुआ है। जानकारों का तो यह भी मानना है कि आज यदि इस तरह की डिजाइनदार जाली को ढलवाया जाए, तो उसकी लागत बहुत अधिक होगी, और उस पर भी ऐसा लोहा मिलना मुश्किल होगा।
नए निर्माण में बालकनी हटने के बाद इस कलात्मक रैलिंग के इस्तेमाल को लेकर दुविधा बनी हुई थी। मंदिर प्रबंध समिति की पिछली बैठक में तय किया गया है कि इस रैलिंग को अब मुख्य मंदिर की बालकनी पर लगाया जाएगा। यह कलात्मक जाली निश्चित रूप से मंदिर के मुख्य परिसर के सौंदर्य में चार चांद लगाने का काम करेगी। इस प्रस्ताव को बैठक में सभी ने सराहा और एकमत होकर उसे पारित कर दिया।
बैठक में समिति के अध्यक्ष श्री भगवान स्वरूप शिवहरे ने एक अहम प्रस्ताव भी पेश किया, जिसमें समाज के लोगों से मंदिर पुनरुद्धार के पुनीत कार्य में उनके स्वैच्छिक योगदान का स्वागत किया गया। उन्होंने कहा कि मंदिर पुनरुद्धार कार्य जिस तरह चल रहा है, सभी समाजबंधुओं ने उसका स्वागत किया है, लेकिन यह मलाल भी जाहिर किया कि इस पुनीत कार्य में उनसे कोई योगदान नहीं लिया गया।
मंदिर अध्यक्ष ने कहा कि मंदिर का निर्माण अब तक तो उसके अपने ही संसाधनों से हो रहा है। खास बात यह है कि काम जितने बजट अनुमान को लेकर शुरू हुआ था, वास्तविक बजट उससे कहीं अधिक हो गया है। औऱ, फिलहाल उनकी पूर्ति मंदिर के अपने ही संसाधनों से हो रही है।
मंदिर अध्यक्ष ने कहा कि मंदिर श्री दाऊजी महाराज, आगरा के शिवहरे समाज की धरोहर है, इसलिए इसके संरक्षण या पुनरुद्धार कार्य में सहयोग करने का अधिकार आगरा के हर शिवहरे बंधु को है। यदि कोई समाजबंधु कोई योगदान इस कार्य में करना चाहता है तो उसका स्वागत है। इच्छुक समाजबंधु समिति से संपर्क कर सकते हैं।
क्या दाऊजी मंदिर पुनरुद्धार में योगदान करना चाहते हैं….स्वागत है
