August 6, 2026
शिवहरे वाणी, D-30, न्यू आगरा, आगरा-282005 [भारत]
शिक्षा/करियर

मिसालः बेटियों की प्रेरणा से 44 वर्ष की आयु में ‘डिप्टी कलक्टर’ बने ललित मेवाड़ा, आरएएस परीक्षा में 390वीं रैंक

पाली।
राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) परीक्षा-2018 के हाल में घोषित अंतिम परिणामों में ललित मेवाड़ा की कामयाबी की दास्तान साबित करती है कि कुछ करने का जज्बा हो तो शुरुआत कभी भी की जा सकती है। सरकारी अस्पताल में मेल नर्स की नौकरी कर रहे ललित मेवाड़ा ने दोनों बेटियों की प्रेरणा से प्रशासनिक अफसर बनने की ठानी, और इस इरादे से 15 साल बाद फिर पढ़ाई से जुड़े, स्नातक किया और नौकरी पर रहते हुए कड़ी मेहनत से तैयारी की। और, अंततः 44 वर्ष की आयु में प्रशासनिक अधिकारी बनने के सपने को साकार कर लिया। 

राजस्थान के पाली जिले में सुमेरपुर तहसील के पास बिसलपुर गांव के रहने वाले ललित मेवाड़ा ने शिवहरेवाणी को बताया कि लिखित परीक्षा वर्ष 2018 में हो गई थी लेकिन सबसे मुश्किल दौर इंटरव्यू का था जो इस साल अप्रैल में हुआ, जब कोरोना की दूसरी लहर चल रही थी। अस्पताल से छुट्टी मिल पाना संभव नहीं हो रहा था। लिहाजा अस्पताल में कोरोना मरीजों के वार्ड में ड्यूटी करने के साथ ही साक्षात्कार की तैयारी भी करते रहे। और, बीती 13 जुलाई को अंतिम परिणाम घोषित हुआ तो 390वीं रैंक पर अपना नाम पाकर ललित और उनके परिवार की खुशी का ठिकाना न रहा। 

1977 में जन्मे ललित मेवाड़ा पुत्र श्री हजारीमलजी मेवाड़ा ने अपनी प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा बिसलपुर गांव के ही सरकारी स्कूल से की। 1996 में इंटरमीडियेट (साइंस बायोलॉजी) की परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने नर्सिंग का पेशा अपना लिया। शुरुआत संविदाकर्मी के रूप में हुई और 2003 में नियमित हो गए। वर्तमान में वह मेल नर्स सेकेंड ग्रेड के रूप में सुमेरपुर के सरकारी अस्पताल में तैनात हैं। लेकिन, सरकारी नौकरी के बाद भी प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना उन्हें लगातार बेचैन किए हुए था। 2011 में उन्होंने अपनी पढ़ाई फिर से शुरू करने का फैसला किया। यह बड़ा मुश्किल और चुनौतीपूर्ण निर्णय था जिसमें उन्हें पत्नी जयश्री मेवाड़ा का पूरा समर्थन और सहयोग मिला। 

2011 में उन्होंने बीए में दाखिला लिया और समाजशास्त्र, इतिहास एवं लोक-प्रशासन (पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन) विषय के साथ 2014 में स्नातक उत्तीर्ण किया। इसके बाद प्रशासनिक सेवा (आरएएस) की तैयारी में जुट गए। बा किसी कोचिंग को ज्वाइन किए बिना पूरी तैयारी घर पर ही की। इसमें दोनों बेटियों सुरभि (18 वर्ष) और खुश्बू (16 वर्ष) ने भी पापा का खूब सपोर्ट किया। खासकार उनकी पुस्तकें सामान्य अध्ययन की तैयारी में काफी सहायक रहीं। समाचारपत्रों और पत्रिकाओं का गहन अध्ययन, राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, प्रादेशिक मुद्दों और घटनाक्रमों के साथ ही विषयों से संबंधित अध्ययन कर स्वयं को लगातार अपडेट करते रहे। 

आरएएस के पहले दो प्रयासों में उन्हें सफलता नहीं मिली लेकिन ललित मेवाड़ा जैसे लोग हार नहीं मानते। वह बताते हैं कि उन्होंने हर असफलता के बाद दोगुने उत्साह और विश्वास के साथ अगले प्रयास की तैयारी की। आरएएस परीक्षा-2018 उनका तीसरा प्रयास था जिसमें उन्होंने लिखित परीक्षा के चारों पर्चों में शानदार सफलता हासिल कर साक्षात्कार में जगह बनाई। परीक्षा का साक्षात्कार इस साल अप्रैल में हुआ था और अंतिम परिणाम 13 जुलाई को जारी हुआ। 

फिलहाल ललित मेवाड़ा के संघर्ष और कामयाबी की दास्तान पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।  ललित मेवाड़ा अपनी सफलता का श्रेय पिता श्री हजारीमल मेवाड़ा के आशीर्वाद, पत्नी जयश्री मेवाड़ा के त्याग, दोनों बेटियों की प्रार्थना और गुरुजनों व मित्रों की शुभकामनाओं को देते हैं। वहीं दोनों बेटियां अपने पिता पर गर्व महसूस कर रही हैं। सुरभि ने तो पिता की तरह प्रशासनिक अफसर बनने की ठान ली। कहती हैं, ‘पापा को तैयारी कराते वक्त  काफी कुछ तैयारी तो अभी से हो गई है। ‘ 
 

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