शिवहरे वाणी नेटवर्क
नई दिल्ली।
गांधीवादी चिंतक एवं सामाजिक कार्यकर्ता श्याम नारायण चौकसे की एक और अदालती मुहीम कामयाबी के मुकाम पर पहुंच गई, जब दिल्ली हाईकोर्ट ने महात्मा गांधी के समाधिस्थल की दुर्दशा को लेकर उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि क्या किसी पूजास्थल को गंदी और बुरी हालत में रखा जा सकते। कोर्ट ने कहा कि राजघाट पर महात्मा गांधी का स्मारक ऐसे ही किसी पूजास्थल की तरह है।
हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस सी. हरीशंकर ने राजघाट के रखरखाव, संरक्षण और प्रशासनिक कार्य देखने वाली राजघाट समाधि समिति (आरएससी) की खिंचाई करते हुए कहा कि हम चकित हैं कि क्या पूजास्थल को ऐसी गंदी और बुरी हालत में रखा जा सकता है। बैंच ने हाईकोर्ट के 2012 के एक फैसले का उल्लेख भी किया जिसमें शहरी विकास मंत्रालय ने राजघाट समाधि समिति को एक वैधानिक निकाय की सूची में रखा था जो 2 अक्टूबर और 30 जनवरी को विशेष कार्यक्रम आयोजित करती है। कोर्ट ने कहा, इन वार्षिक आयोजनों के अलावा सर्वधर्म प्रार्थना और कताई कार्यक्रम भी यहां नियमित रूप से होते हैं। पीठ ने समिति को राष्ट्रपिता के प्रति श्रद्धा दर्शाते हुए उनके स्मारक के समुचित रखरखाव को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
याची श्याम नारायण चौकसे ने दावा किया था कि स्मारक की उचित देखभाल नहीं की जा रही है और समिति एवं शहरी विकास मंत्रालय के संज्ञान में लाए जाने के बाद भी हालात में सुधार नहीं हुआ है। चौकसे ने 2014, 2015 और 2016 में लिए गए स्मारक के फोटोग्राफ दिखाते हुए अदालत से कहा था कि स्थिति सुधरने के बजाय और खराब हो रही है।
बता दें कि भोपाल निवासी श्याम नारायण चौकसे की याचिका पर ही सुप्रीमकोर्ट ने सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य करते हुए इस दौरान दर्शकों के खड़ा होने का आदेश दिया था। हालांकि बाद में सर्वोच्च अदालत ने अपना यह फैसला वापस ले लिया लेकिन चौकसे का कहना है कि वह राष्ट्रगान के सम्मान के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे।
खबरे जरा हटके
एक और कानूनी जंग जीते चौकसे, रंग लाई गांधीगीरी… जानिये क्या है मामला
- by admin
- October 29, 2016
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- 9 years ago












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