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राधाअष्टमी पर राधामय हुआ राधाकृष्ण मंदिर; भजनों की धुन पर थिरक उठे लोग; नयनाभिराम दर्शनों ने किया निहाल

आगरा। 
एक जगह भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि ‘जब कोई केवल ‘रा’ बोलता है तो मैं सब काम छोड़ कर खड़ा हो जाता हूँ, और जैसे ही ‘धा’ शब्द का उच्चारण करता है, वैसे ही मैं उसकी ओर दौड़ लगा कर उसे अपनी गोद में भर लेता हूं।‘ अब यह सौभाय किसे प्राप्त होता है, यह भी स्वयं भगवान की इच्छा पर निर्भर है।

बीती शाम राधाकृष्ण मंदिर (शिवहरे समाज) में हुए राधाअष्टमी उत्सव में हर जीह्वा पर रा-धा नाम का उच्चारण था, हर चित्त भक्ति में रमा था, और हर मन आनंद से प्रफुल्लित था… मानो भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं आकर उत्सव को संचालन अपने हाथ में ले लिया हो। अफसोस यह कि मंदिर के बिल्कुल निकट रहने वाले शिवहरे समाज के ज्यादातर लोग इस अद्भुत आनंद की प्राप्ति के सौभाग्य से वंचित रह गए। भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के कारण, या फिर अपनी ही धरोहर के प्रति उपेक्षापूर्ण रवैये के कारण, वजह चाहे जो रही हो लेकिन मंदिर में नहीं आने का निर्णय उनका ही था। यह अलग बात है कि उनके इस निर्णय के पीछे भी भगवान की ही इच्छा रही होगी।

मंदिर कमेटी ने इस बार राधाअष्टमी पर भजन संध्या का कार्यक्रम रखा था। निर्धारित सात बजे तक मंदिर में अध्यक्ष अरविंद गुप्ता, महासचिव मुकुंद शिवहरे, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अशोक शिवहरे ‘अस्सो’, उपाध्यक्ष ऋषिरंजन शिवहरे, वरिष्ठ सदस्य राजेंद्र गुप्ता मास्टरसाहब और रामगोपाल गुप्ता आदि गिने-चुने लोग ही थे। इससे कहीं अधिक संख्या तो भजन मंडली के कलाकारों की थी। राधाकृष्ण दरबार में आकर्षक फूलबंगला सजाया गया था, पूरे मंदिर परिसर में गुब्बारों और फूलों की सजावट की थी। राधा-कृष्ण दरबार, राम परिवार और सभी स्वरूप नई पोशाक में नयनाभिराम दर्शन दे रहे थे। कमल और गुलाब के फूलों की माला राधा-कृष्ण के अदभुत श्रृंगार में चार चांद लगा रही थी। पूड़ी-सब्जी की प्रसादी का इंतजाम किया गया था। इतने तामझाम और व्यवस्थाओं के बावजूद बेहद मामूली उपस्थिति का मलाल मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों को चेहरों पर नुमाया था।
लेकिन, भगवान तो संख्या नहीं भाव देखता है। भजन मंडली ने पूरे मनोयोग से राधारानी के एक से बढ़कर एक भजन प्रस्तुत किए और लोगों को भक्तिभाव में ऐसा रमा दिया कि कब नौ बज गए, पता ही नहीं चला। इस दौरान मंदिर में भक्तों की उपस्थिति भी धीरे-धीरे बढ़कर करीब 20 तक हो गई। इनमें भी दूरदराज से आए समाजबंधु ही अधिक थे। रात नौ बजे के बाद मंदिर कमेटी के कोषाध्यक्ष कुलभूषण गुप्ता ‘रामभाई’ ने माइक संभाला और भजन मंडली को अपने सुरों की संगत दी। फिर क्या था, अध्यात्म का ऐसा आनंद बरसा कि लोग मग्न होकर नाचने लगे। भक्तों की संख्या भी इस दौरान आश्चर्यजनक रूप से ठीक-ठाक हो चुकी थी। रात साढ़े नौ बजे आरती के साथ भजन संध्या का समापन हुआ। अंत में भक्तों ने पूढ़ी-सब्जी की प्रसादी के दिव्य स्वाद का आनंद प्राप्त किया। 
समारोह में मुख्य रूप से मंदिर के वरिष्ठ सदस्य जगदीश गुप्ता, संजय शिवहरे और दाऊजी मंदिर कमेटी के धर्मेश शिवहरे एवं मोतीलाल शिवहरे के अलावा अजय गुप्ता (कृष्णा रेफ्रीजरेशन), कृष्ण मुरारीलाल गुप्ता, रिषी गुप्ता, सोनिया शिवहरे, अल्का शिवहरे, आरती शिवहरे, साधना गुप्ता, सुमन शिवहरे, पूनम गुप्ता, रजनी गुप्ता समेत कई स्वजातीय जन उपस्थित रहे।  
 

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