कोलकाता।
कोलकाता का स्वप्निल जायसवाल इस बार आईपीएल खेल पाएगा? कोलकाता के जो लोग स्वप्निल को दिन-रात कड़ी मेहनत करते देख रहे हैं, उनमें से कुछ को भरोसा है कि वह आईपीएल तो खेलेगा ही, टीम इंडिया में भी जगह बनाएगा। वहीं, कुछ ऐसे भी हैं जो इसे एक मुश्किल संभावना मानते हैं। इन लोगों का कहना है कि बेशक स्वप्निल बहुत प्रतिभाशाली और मेहनती क्रिकेटर है, लेकिन यही काफी नहीं होता है। उसके पास एक स्तरीय किट नहीं है, इंटरनेशनल लेवल का बल्ला तक नहीं है, और आज के दौर में इनके बिना कोई क्रिकेटर अपना सपना पूरा नहीं कर सकता।
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देश के लिए क्रिकेट खेलने का सपना लेकर पांच साल पहले कोलकाता पहुंचे आजमगढ़ (यूपी) के स्वप्निल इन दिनों यूनीवर्सिटी, डिवीजन औऱ क्लब क्रिकेट में धड़ाधड़ शतक बना रहे हॆ, और ताबड़तोड़ विकेट ले रहे हैं। बिना किसी गुरू और गॉडफादर के स्वप्निल ने अपनी प्रतिभा को मेहनत के बल पर तराशकर कोलकाता के क्रिकेट में खास पहचान पा ली है। राइट हैंड मिडिल आर्डर बैट्समैन और राइट हैंड ऑफ स्पिनर स्वप्निल पिछले चार साल से ऑल यूनीवर्सिटी वेस्ट जोन के कैप्टन हैं। वह मुंबई प्रीमियर लीग मुंबई पैंथर टीम का भी हिस्सा हैं, जिसके कप्तान पृथ्वी शॉ हैं। इसके अलावा वह कोलकाता के प्रतिष्ठित एसीए क्लब के सबसे सफल खिलाड़ी हैं। अपने अब तक के प्रदर्शन के आधार पर स्वप्निल को उम्मीद है कि आईपीएल के अगले सीजन में उनको भी खेलने का मौका मिलेगा।
स्वप्निल कोलकाता नाइटराइडर्स, चेन्नई सुपरकिंग्स और पंजाब किंग्स इलेवन समेत कई आईपीएल टीमों को नेट प्रेक्टिस में सपोर्ट करते रहे हैं। इस दौरान उन्होंने महेंद्र सिंह धोनी, गौतम गंभीर, विराट कोहली, आर अश्विन, युसुफ पठान जैसे बड़े खिलाड़ियों के साथ नेट अभ्यास में भाग लिया। स्वप्निल बताते हैं कि बड़े खिलाड़ियों के साथ नेट अभ्यास में उन्हें खेल की बारीकियों को समझने का मौका मिला जिससे उनकी क्रिकेट और बेहतर हुई है।
स्वप्निल के पिता श्री ओमप्रकाश जायसवाल एक साधारण शिक्षक हैं जो अपने बेटे को भी टीचर बनाना चाहते थे। लेकिन, स्वप्निल क्रिकेटर बनना चाहते थे। 2016 में स्वप्निल अपने दोस्त नंदलाल और मामा रमेश से पैसे लेकर वेस्ट बंगाल टीम के लिए ट्रायल देने कोलकाता गए, और उसके बाद कोलकाता के ही होकर रह गए।
हाल ही में भोपाल के एलएनसीटी कालेज के डायरेक्टर श्री अनुपम चौकसे ने स्वप्निल की प्रतिभा को देखते हुए कालेज के स्पेशल फंड से कुछ धनराशि उसे किट का सामान खरीदने के लिए मुहैया कराई है। लेकिन एक किट और इंटरनेशऩल स्तर के बल्ले के लिए यह नाकाफी है। स्वप्निल ने शिवहरेवाणी से बातचीत में एलएनसीटी के डायरेक्टर अनुपम चौकसे का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज के दौर में एक अच्छी किट के बगैर क्रिकेट में आगे पहुंच पाना बहुत मुश्किल है। क्रिकेट बदल चुका है, अब टी-20 और वनडे मुकाबलों में बल्लेबाज के टेलेंट के साथ उसके बल्ले की क्वालिटी भी उतना ही मायने रखती है, आजकल बड़े इंटरनेशनल मुकाबलों में जो ताबड़तोड़ छक्के पड़ते हैं, एक अच्छे बल्ले के बिना संभव ही नहीं है। इंटरनेशनल स्तर के ये बल्ले लाखों की राशि में आते हैं। मेरा भी सपना है कि ऐसे ही एक अच्छे बल्ले और अच्छी किट के साथ मैदान में उतरूं।
स्वप्निल बहुत सीमित संसाधनों में अपने खेल को आगे बढ़ाने का संघर्ष कर रहे हैं। कोलकाता में एक किराये के कमरे मे रहते हैं, सुबह पांच बजे मैदान में पहुंच जाते हैं, दोपहर को घर लौटते हैं, औऱ कुछ घंटे बाद शाम को फिर मैदान। इस बीच कोई छोटा-मोटा काम करके जैसे तैसे अपने खर्चे निकाल लेते हैं। आजमगढ़ के इस होनहार क्रिकेटर को उसका मुकाम मिलना ही चाहिए। लेकिन फिलहाल तो उसे बल्ले और किट के लिए जूझना पड़ रहा है।
