झांसी/भोपाल।
‘अखिल भारतवर्षीय हैहय कलचुरी महासभा’ का 91वां स्थापना दिवस समारोह आगामी 1 व 2 अगस्त को वाराणसी में मनाया जाएगा। बीती 21 जून को झांसी में महासभा की उत्तर प्रदेश इकाई के शपथ समारोह के तत्काल बाद राष्ट्रीय महामंत्री एमएल राय औऱ प्रदेश अशोक राय एक शिष्टमंडल के साथ वाराणसी पहुंचे और वहां समारोह की व्यवस्थाएं तय कीं। शिष्टमंडल ने महासभा के संरक्षक एवं यूपी शासन के स्टाम्प राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल से मुलाकात कर उन्हें समारोह में आमंत्रित किया।

वाराणसी से झांसी लौटने के बाद प्रदेश अध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक अशोक राय ने शिवहरेवाणी को बताया कि वैसे तो महासभा का स्थापना दिवस 3 अगस्त को होता है लेकिन इस बार किन्हीं कारणों से इसे 1 व 2 अगस्त को मनाने का निर्णय लिया गया है। दो दिवसीय स्थापना समारोह वाराणसी में नगर निगम के निकट स्थित ‘रुद्राक्ष इंटरनेशनल कारपोरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर’ में खुला मंच एवं सेमीनार के रूप में मनाया जाएगा। अतिथियों के ठहराव की व्यवस्था हैदराबाद गेट स्थित ‘होटल योग रेजीडेंसी’ एवं ‘होटल केवल पैलेस’ में की गई है जो 31 जुलाई को दोपहर 12 बजे से 2 अगस्त को दोपहर 12 बजे तक रहेगी। वाराणसी गए शिष्टमंडल में राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष पूनम चौधरी गुप्ता (दिल्ली), राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुशीला चौकसे (भोपाल), मध्य प्रदेश इकाई के हरिओम राय (ग्वालियर), उ.प्र. कोषाध्यक्ष सुमित राय, नरेश राय शामिल रहे।

उधर, भोपाल में राष्ट्रीय महामंत्री एमएल राय (भोपाल) ने बताया कि स्थापना दिवस समारोह इस बार उत्तर प्रदेश इकाई एवं उत्तर प्रदेश महिला इकाई के संयोजन में संपन्न होगा जिसमें महासभा के राष्ट्रीय प्रदेश, जिला एवं विभिन्न इकाइयों के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, बुद्धिजीवी, समाजसेवी एवं स्वजातीय बंधु भाग लेंगे। एक अगस्त को सुबह 10 बजे महासभा का स्थापना दिवस ‘खुला मंच’ के रूप में मनाया जाएगा। इसमें महासभा की स्मारिका सहस्रदीप का विमोचन भी किया जाएगा। अगले दिन 2 अगस्त को सुबह 10 बजे से 11 बजे तक राष्ट्रीय एवं प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक होगी जिसमें संगठन के सुदृढ़ीकरण, शिक्षा सुधार, महिला सशक्तिकारण, युवाओं की सहभागिता तथा सामाजिक एकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। दोपहर 12 बजे लंच के साथ कार्यक्रम का समापन होगा। उन्होंने बताया कि इस बीच समय मिलने पर अतिथियों को बाबा विश्वनाथ के दर्शन भी करवाए जा सकते हैं।

कलचुरी समाज की जागृत चेतना की मिसाल है महासभा
आपको बता दें कि ‘अखिल भारतवर्षीय हैहय कलचुरी महासभा’ दरअसल सामाजिक सुधार, शिक्षा और प्रगति को लेकर कलचुरी समाज की जागृत चेतना की जीती-जागती मिसाल है। समारोह ऐसे वक्त में हो रहा है जब एक तरफ जातिगत जनगणना के संदर्भ में कलचुरी समाज के अंदर ‘एक पहचान’ को लेकर विमर्श तेज हो चला है, और दूसरी तरफ पवित्र महेश्वर नगरी में भव्य ‘सहस्रबाहु धाम’ के निर्माण को लेकर हलचल जोरों पर है। इन दोनों ही अभियानों में बड़ी भूमिका‘ अखिल भारतवर्षीय हैहय कलचुरी महासभा’के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जयनारायण चौकसे की रही है।
सौ साल से भी अधिक पुरानी है महासभा
महासभा भले ही अपना 91वां स्थापना दिवस मनाने जा रही है, लेकिन सही मायनों में यह 100 वर्षों से भी अधिक पुरानी संस्था है, और राष्ट्रीय स्तर पर कलचुरी समाज की पहली रजिस्टर्ड संस्था होने का गौरव भी इसे ही हासिल है। हालांकि कलचुरी समाज की कई इससे पुरानी संस्थाएं भी थीं लेकिन उनका कार्यक्षेत्र स्थानीय स्तर पर ही रहा। इस संस्था का रजिस्टर्ड नाम ‘अखिल भारतवर्षीय हैहय कलचुरी महासभा’ है जिसका इतिहास कहीं न कहीं प्रयागराज की सबसे पुरानी सामाजिक संस्था ‘श्री हैहय क्षत्रिय जायसवाल सभा, प्रयाग’ से जुड़ता है।

प्रयागराज से जुड़ी हैं महासभा की जड़ें
‘श्री हैहय क्षत्रिय जायसवाल सभा, प्रयाग’ की स्थापना तत्कालीन समाज सुधारक लाला हनुमान प्रसाद जायसवाल (बहादुरगंज), छोटे लाल महाजन (हिम्मतगंज) द्वारा 1905 में की गई थी। इसका कार्यक्षेत्र प्रयागराज और आसपास के क्षेत्र में जायसवाल समाज के मानव एवं सामाजिक विकास के उद्देश्य से किया गया था। इस संस्था के गठन के साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर भी ऐसी ही संस्था के गठन का विचार भी प्रतिपादित हुआ। लेकिन इस दिशा में कोई ठोस पहल होने में 6 वर्ष लग गए।

डा. काशीप्रसाद जायसवाल रहे थे अध्यक्ष
1911 में प्रयागराज में स्व. श्री कुंदनलाल जायसवाल (दिल्ली) और स्व. श्री फूलचंद्र जायसवाल (नीमच) की अध्यक्षता में हुए हैहय क्षत्रिय समाज के महाधिवेशन में ‘अखिल भारतवर्षीय हैहय क्षत्रिय महासभा’ का गठन हुआ। इसके बाद इस नवगठित संस्था के कई राष्ट्रीय अधिवेशन हुए। इसी क्रम में एक महत्वपूर्ण सम्मेलन 26 से 28 सितंबर, 1926 को जबलपुर में हुआ था जिसकी अध्यक्षता महान इतिहासकार डा. काशीप्रसाद जायसवाल ने की थी, और सचिव थे जाने-माने पुरातत्वविद एवं विद्वान ‘राय बहादुर’ डा. हीरालाल राय। संस्था ने अगले कुछ वर्षों का सफर इन्हीं दो महान विभूतियों के मार्गदर्शन और नेतृत्व में तय किया।
हीरालाल राय ने कराया था पंजीकरहण
वर्ष 1933 में डा. हीरालाल राय के मार्गदर्शन महासभा के पंजीकरण की रूपरेखा तैयार हुई और 3 अगस्त, 1935 को महासभा का पंजीकरण हुआ। पंजीकरण के बाद डा. महान गणितज्ञ गोरख प्रसाद जायसवाल इसके पहले अध्यक्ष बने थे जो अपने पूर्ववर्ती अध्यक्षों डा. काशीप्रसाद जायसवाल एवं राय बहादुर डा. हीरालाल राय के समान ही अपने क्षेत्र में अंतराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात थे। डा. गोरख प्रसाद जायसवाल और उनके बाद के अध्यक्षों के कार्यकाल में महासभा राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक उत्थान के अपने उद्देश्य पर समर्पित भाव से काम करती रही।
एक नाम, एक लोगो, एक ध्वज
महासभा के मौजूदा अध्यक्ष श्री जयनारायण चौकसे भी एक जाने-माने शिक्षाविद और समाजसेवी व समाज-सुधारक हैं। उनके नेतृत्व में महासभा राष्ट्रीय स्तर पर ‘एक नाम, एक लोगो, एक ध्वज’ के माध्यम से समाज की एक पहचान स्थापित करने के रोडमैप पर आगे बढ़ रही है।

यूपी शासन के मंत्री रविंद्र जायसवाल की धर्मपत्नी श्रीमती मंजू जायसवाल का अभिनंदन करतीं राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष श्रीमती पूनम चौधरी गुप्ता एवं उपाध्यक्ष श्रीमती सुशीला चौकसे।














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