April 17, 2026
शिवहरे वाणी, D-30, न्यू आगरा, आगरा-282005 [भारत]
शख्सियत समाचार

नारी सामर्थ्य, शक्ति और साहस की जीती-जागती मिसाल हैं मालती राय; गांव की बहू जिसने महापौर बनकर भोपाल को बनाया नंबर-1

भोपाल।
चैत्र नवरात्र मातृशक्ति की उपासना का पावन पर्व है जो नारी के नौ रूपो और उनकी दिव्य ऊर्जा को समर्पित है। यह पर्व न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाता है, बल्कि नारी शक्ति के सम्मान औऱ समाज में उनके सशक्तिकरण की याद भी दिलाता है।
इन नौ दिनों के पावन उत्सव में हम कलचुरी समाज की ऐसी नौ मातृशक्तियों से आपको मिलवाने का प्रयास करेंगे जो नारी के सामर्थ्य, शक्ति, समर्पण और साहस की जीती-जागती मिसाल बन गई हैं। पहली कड़ी में हम बात करेंगे एक ऐसी महिला की जिसने एक साधारण परिवार में जन्म लिया, और एक साधारण परिवार में ही जिनकी शादी हुई, लेकिन चौतरफा संघर्षपूर्ण परिस्थितियों का सामना करते हुए आज भोपाल की प्रथम नागरिक का गौरव उन्हें हासिल है। बात कर रहे हैं भोपाल की महापौर श्रीमती मालती राय की जिन्होंने कुशल औऱ कर्मठ नेतृत्व से अपने महानगर का कायाकल्प कर यहां के नागरिको को बेहतर और स्वस्थ परिवेश प्रदान किया है, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।

श्रीमती मालती राय का जन्म और स्कूली शिक्षा बीना में हुई। 1983 में 11वीं पास करने के बाद उनका विवाह ललितपुर की पाली तहसील के पिछड़े गांव बालाबेहट में एक साधारण कलचुरी परिवार के पढ़े-लिखे नौजवान एमएल राय से हुआ जो उस समय वकालत की पढ़ाई कर रहे थे। शादी के कुछ वर्षों बाद पति औऱ पूरा भोपाल शिफ्ट हो गया। यहां दो कमरों के एक मकान में ज्वाइंट फैमिली में रहीं। पति की प्रेरणा से उन्होंने अपनी आगे की पढ़ाई शुरू की और परिवार की आर्थिक मदद के लिए 1985 में ब्राइट करियर स्कूल में टीचर के रूप में 175 रुपये की नौकरी लगा ली। बीए, एमए और बीएड करने के बाद 1988 में उन्होंने मात्र 35 बच्चों के साथ पुष्प विहार स्कूल शुरू किया। साथ ही एक सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में भाजपा भी ज्वाइन कर ली।

भाजपा के स्थानीय संगठन में वह विभिन्न पदों पर रहीं। 1894 में प्रोफेसर कालोनी से पार्षद का चुनाव लड़ा मगर हार गईं। 2004 में वह अशोक गार्डन से पार्षद निर्वाचित हुईं। इसी क्षेत्र में उनका घर है। हालांकि 2009 में वह पार्षद का चुनाव हार गईं। और, लंबे संघर्ष औऱ इंतजार के बाद 2022 में वह पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ भोपाल की महापौर बन गईं। अब तक तो मालती राय अपने जीवन में करियर, राजनीति और परिवार की जिम्मेदारियों में सामंजस्य बिठाने की मुश्किलों से पहले ही जूझ रही थीं, जो अब महापौर बनने के बाद और बड़ी चुनौती बन गई। लेकिन मालती राय ने बड़ी कुशलता से सामंजस्य बिठाकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं।

श्रीमती मालती राय अपने पति श्री एमएल राय को प्रेरणास्रोत मानती हैं जो प्रतिष्ठित अधिवक्ता होने के साथ ही राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में भी एक प्रभावशाली नाम है। वह भाजपा क वरिष्ठ नेता हैं और अखिल भारतवर्षीय हैहय कलचुरी महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं। पति के देखा-देखी मालती राय अब सामाजिक क्षेत्र में भी सक्रिय हो गई हैं और कलचुरी समाज के देशभर में होने वाले कार्यक्रमों में शिरकत करती हैं।

महापौर के रूप में उनकी उपलब्धियों की लंबी फेहरिस्त है। उन्होंने भोपाल में स्वच्छता, विकास कार्यों की समीक्षा, और अंतरराष्ट्रीय सहयोग (रूस से सिस्टर सिटी एमओयू) मे सक्रिय भूमिका निभाई। मालती राय के नेतृत्व में भोपाल ने स्वच्छ सर्वेक्षण 2025 में दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजा गया था। 2023 में उन्होंने यूएन-हैबिटेट के सहयोग से देश की पहली शहर-स्तरीय स्वैच्छिक समीक्षा शुरू की। उन्होंने स्वच्छ भोपाल-स्वस्थ भोपाल अभियान के माध्यम से महानगर के लोगों में नागरिक चेतना जागृत करने मे बड़ा योगदान किया। इसके अलावा भी उन्होंने कई कार्य ऐसे कार्य किए जिसके चलते वह भोपाल में मातृ-शक्ति का प्रतीक बनकर उभरी हैं।

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