April 17, 2026
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मुंगेर के ‘वाटरमैन’ किशोर जायसवाल को ‘राष्ट्रीय जल पुरस्कार-2025’; राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किया सम्मानति

नई दिल्ली/मुंगेर।
जल संरक्षण, मृदा सुधार और सामुदायिक सशक्तीकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले मुंगेर जिले के कल्याणपुर निवासी किशोर जायसवाल को भारत सरकार के जलशक्ति मंत्रालय की ओऱ से राष्ट्रीय जल पुरस्कार-2025 (व्यक्तिगत श्रेणी) से सम्मानित किया गया है। मंगलवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु ने उन्हें राष्ट्रीय जल पुरस्कार दिया।
किशोर जायसवाल ने बिहार, झारखंड और विशेष रूप से अंग क्षेत्र (मुंगेर व भागलपुर मंडल) में वर्षा जल संचयन, वाटरशेड विकास औऱ गंगा पुनरुद्धार के लिए तीन दशकों से अधिक समय तक कार्य किया है। उन्होंने 10 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि पर जल संरचनाएं विकसित कीं, जिससे भूजल स्तर में सुधार और कृषि उत्पादकता में वृद्धि हुई है। दिल्ली यूनीवर्सिटी और जवाहरलाल नेहरू यूनीवर्सिटी से उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले किशोर जायसवाल ‘सोसायटी फॉर वाटरशेड एंड रूरल डेवलपमेंट’ के निदेशक हैं और कई राष्ट्रीय संगठनों में नेतृत्वकारी भूमिका निभा चुके हैं। उनकी सोच का मूल मंत्र है–जल जीवन ही नहीं, जल ही भविष्य भी है। इसी विश्वास के साथ वह लंबे समय से जल संरक्षण की दिशा में काम कर रहे हैं। वह वनारोपण औऱ मृदा नमी संरक्षण तकनीकों को बढ़ावा देकर बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने में जुटे हुए हैं। किशोर जायसवाल ने ना केवल बिहार में जल संकट को कम किया, बल्कि कृषि उत्पादकता, पर्यावरणीय स्थिरता और ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता को भी नया आय़ाम दिया है।
किशोर जायसवाल मुंगेर के जिस गांव से आते हैं, वहां एक तरफ गंगा नदी बहती है तो दूसरी ओर चौर (एक ऐसी जगह जहां बरसात का पानी बारिश का सीजन खत्म होने तीन-चार महीने बाद तक जमा रहता है) है। यानी उनके गांव में पानी के पर्याप्त स्रोत हैं। लेकिन, वहां से कुछ ही दूर बांका जिला है जो पूर्ण रूप से बारिश पर निर्भर है। यहां बारिश तो पर्याप्त होती है लेकिन बारिश का पानी ठहरता नहीं था। ऐसे में वहां की जमीन बंजर पड़ी थी। किशोर बताते हैं कि इसे देखते हुए करीब एक दशक पहले बांका में उन्होंने वाटर शेड मुहीम की शुरुआत की और आज स्थिति ऐसी है कि वहां की जमीनें उपजाऊ बन गई हैं। वह बताते हैं कि पिछले साल बारिश कम होने के बावजूद वहां के किसान करीब 250 एकड़ में समय पर धान की फसल उगाने में सफल रहे।
किशोर गंगा नदी के संरक्षण में भी उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। वह इसके लिए स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर लगातार स्वच्छता अभियान, गंगा के तटवर्ती इलाकों में वनरोपण और जनजागरूकता कार्यक्रम चला रहे हैं। उनका उद्देश्य ‘गंगा को केवल नदी नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और परिस्थितिकीय जीवनरेखा के रूप में पुनस्थापित करना है’। किशोर जायसवाल का मानना है कि एक साधारण व्यक्ति भी समाज में असाधरण परिवर्तन ला सकता है बशर्ते उसके पास दृढ़ संकल्प, सामुदायिक भावना और सतत दृष्टोकोण हो। और, इसी सोच को वह जमीन पर उतारते नजर आते हैं।

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