April 22, 2026
शिवहरे वाणी, D-30, न्यू आगरा, आगरा-282005 [भारत]
समाचार

हिंदी से भारतीय भाषा की ओर बढ़ते कदम, विश्व हिंदी दिवस पर विशेष

-पवन नयन जायसवाल-
अभी कुछ दिन पहले, हमारे देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी ने भारत की यात्रा पर आए रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन का देश की राजधानी दिल्ली के हवाई अड्डे पर गर्मजोशी के साथ भावभीना स्वागत किया और दोनों ही एक ही वाहन में बैठकर जिस रास्ते से आगे बढ़े उस पूरे रास्ते में लगे स्वागत फलक (बैनर) में एक भी फलक अंग्रेजी भाषा में नहीं था। सारे फलक पर केवल हिंदी और रूसी भाषा में लिखा था।
हिंदी में लिखा था- “स्वागत है मित्र पुतिन का।” और रूसी में लिखा था- “डोब्राई पाद्डी, द्रुग मोदी!”
सबसे आश्चर्यजनक बात यह थी कि अंग्रेजी? वो तो कहीं दिखी ही नहीं! यानी संदेश साफ है- “अब हमारी बातचीत हमारी अपनी भाषा में होगी, देश की भाषा में। किसी तीसरे देश की भाषा की गुलामी अब नहीं!” एक बात और, रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन का इंटरव्यू भी सिर्फ़ दो भाषाओं में- हिंदी और रूसी! यह देशवासियों के लिए सरकार की ओर से दिया गया सुखद संकेत है।
हमारी भारतीय भाषा हिंदी का सम्मान, सभी भारतीय भाषाओं का भी सम्मान है। हमने भी अपने देश में संपर्क के लिए हिंदी के साथ केवल भारतीय भाषाओं का ही प्रयोग करना चाहिए। आज हिंदी में कितने ही विदेशी भाषा के शब्द हैं वह स्वीकार्य हैं पर अब तो अंग्रेजी भाषा के शब्दों में हिंदी कहीं खो गयी लगती है। टेलीविजन के हिंदी चैनलों के समाचारों और हिंदी समाचार पत्रों में भी धड़ल्ले से अँग्रेजी भाषा के शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है। समाचार के शीर्षक भी मोटे-मोटे अक्षरों में अंग्रेजी शब्दों के साथ छापे जा रहे। हिंदी के प्रथम समाचार पत्र उदन्त मार्तण्ड का प्रकाशन कोलकाता से 30 मई 1826 को हुआ था। यह वर्ष हिंदी पत्रकारिता अपने 200 सौ वर्ष पूर्ण कर रही है। ऐसे में याद आती है हिंदी के महान गीतकार गोपालदास सक्सेना ‘नीरज’ की यह पंक्तियां-
“अंग्रेजी की तान अलापे
हिंदी की सारंगी,
जमाने, धत तेरे की।”
इस समय आधुनिक हिंदी भाषा के जनक भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की कविता ‘निज भाषा’ की यह प्रसिद्ध पंक्ति का उल्लेख किया जाना भी आवश्यक है-
निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल,
बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।
अपनी भाषा के महत्व को रेखांकित करती यह पंक्ति हमें अपनी भाषा के प्रति सजग और समर्पित रहने की प्रेरणा देती है।
लगता है स्वदेशी शब्द को सार्थक करते हुए अब हमारे कदम सभी क्षेत्रों में भारतीयता के साथ-साथ भारतीय भाषाओं की ओर भी बढ़ रहे हैं। निश्चित ही इसमें हिंदी की इसमें प्रमुख भूमिका रहेगी। यह हम सभी देशवासियों के लिए हर्ष और गर्व की बात है।
विश्व हिंदी दिवस, विश्व में हिंदी के प्रचार-प्रसार के संकल्प में हमारे योगदान, मूल्यांकन और गौरवान्वित होने का दिवस है।
पवन नयन जायसवाल
सुसंवाद, संदेश- 94217 88630
अमरावती, विदर्भ, महाराष्ट्र

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