September 18, 2026
शिवहरे वाणी, D-30, न्यू आगरा, आगरा-282005 [भारत]
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दाऊजी मंदिर में 30 दिसंबर को 129वां दाऊजी पूर्णिमा समारोह, फूल-बंगले में दर्शन, मोहन-बाटी का भोग

आगरा। 
30 दिसंबर, दिन बुधवार…दाऊजी की पूनो…वर्ष के सबसे पवित्र माह मार्गशीर्ष का अंतिम दिन, जिस दिन चंद्रमा को अमृत से सिंचित किया गया था। हम आगरा के शिवहरे समाज के लोगों के लिए अवसर है कि इस महान उपलक्ष्य को अपनी प्रमुख धरोहर के स्वामी दाऊजी महाराज की उपासना से सार्थक बना दें। मंदिर श्री दाऊजी महाराज परिसर में सुबह 7 बजे से शहनाई की गूंज के बीच में दाऊजी की पूजा-अर्चना करें, प्रातः 9 बजे मंदिर में दाऊजी महाराज की आरती में उपस्थित हों, तत्पश्चात मोहन-बाटी का प्रसाद ग्रहण करें। 

बहुत कम लोगों को यह मालूम होगा कि मंदिर श्री दाऊजी महाराज में विराजमान दाऊजी महाराज की प्रतिमा उनके प्राचीनतम मुद्रा में है। दाऊजी महाराज की सबसे प्राचीन मूर्तियां मथुरा और ग्वालियर क्षेत्र में ही प्राप्त हुई थीं, और ये सभी मूर्तियां  शुंगकालीन और कुषाणकालीन हैं। कुषाणकालीन मूर्तियों में दाऊजी महाराज  द्विभुज हैं और उनका मस्तक मंगलचिह्नों से शोभित सर्पफनों से अलंकृत है। बलराम का दाहिना हाथ अभयमुद्रा में उठा हुआ है और बायें में मदिरा का चषक है।

 बाद में ऐसी मूर्तियां बनीं जिनमें दाऊजी महाराज बायें हाथ में हल-मूसल लिए हुए हैं, और अब इसी प्रकार की मूर्तियां अधिक पाई जाती हैं। सदरभट्टी स्थित शिवहरे समाज की धरोहर मंदिर श्री दाऊजी महाराज में विराजमान दाऊजी महाराज की मूर्ति उनकी प्राचीनत मुद्रा में हैं, जो ब्रज क्षेत्र में भी कहीं-कहीं ही नजर आती है, ब्रज के बाहर तो यह दुर्लभ है। मंदिर में दाऊजी की पूर्णिमा का यह 129वां समारोह है।

मंदिर श्री दाऊजी महाराज प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्री भगवान स्वरूप शिवहरे ने शिवहरेवाणी को बताया कि 30 दिसंबर को मंदिर परिसर में दाऊजी पूर्णिमा का 129वां समारोह पारंपरिक भव्यता से मनाया जाएगा। इस अवसर पर सुबह सात बजे से सर्दी के सतरंगी परिधानो में सुसज्जित दाऊजी महाराज भव्य फूलबंगले में दर्शन देंगे। शहनाई और ताशों की मंगलधुन से आगंतुक भक्तगणों का स्वागत किया जाएगा। सुबह 9 बजे दाऊजी महाराज की आरती के बाद भक्तगण व्यंजन मोहन-बाटी का प्रसाद प्राप्त करेंगे। मंदिर प्रबंध समिति ने आगरा के सभी शिवहरे बंधुओं से समाज की प्रमुख धरोहर के स्वामी दाऊजी महाराज में उपस्थिति देकर महाआरती के आयोजन को यादगार बनाने का अनुरोध किया है। 

मंदिर के पुजारी श्री राजकुमार शर्मा ने बताया कि सनातन धर्म से जुड़ी मान्यताओं में दाऊजी की पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस पूर्णिमा का उल्लेख सभी पौराणिक ग्रंथों में मिलता है। ब्रज में यह दाऊजी की पूर्णिमा के नाम से मनाई जाती है। भगवान श्रीकृष्ण अपने बड़े भाई बल्देव को प्रेम से दाऊ कहते थे। दाऊजी पूर्णिमा को गद्दल पूनो के नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि इस दिन से दाऊजी महाराज को सर्दी से बचाने के लिए रजाई ओढ़ाई जाती है। इस तरह वह सभी ब्रजवासियों को संदेश देते हैं कि अब सर्दी से बचने के लिए उन्होंने स्वयं भी रजाई ओढ़ ली है, अतः भक्तगण भी सर्दी से बचाव की तैयारी कर लें।

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