शिवहरे वाणी नेटवर्क/एजेंसी
मुंबई/नई दिल्ली।
महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी सुबोध जायसवाल एक बार फिर केंद्र सरकार के पास जाएंगे। चर्चा यह है कि रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) में कई बरस तक काम कर चुके सुबोध जायसवाल को नेशनल सिक्योरिटी (NSG ) का डीजी बनाया जा सकता है।

दरअसल, डीजीपी सुबोध जायसवाल और महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार के रिश्तों में काफी खटास आ चुकी है। बीते दिनों महाराष्ट्र सरकार ने कई पुलिस अधिकारियों के तबादले किए थे। बताते हैं कि इन तबादलों को लेकर डीपीसी से कोई सलाह मश्विरा नहीं किया और कई सीनियर अफसरों को इधर से उधर कर दिया गया। इसे लेकर डीजीपी इस कदर खफा हैं कि उन्होंने महाराष्ट्र छोड़ने का फैसला कर लिया। सूत्रों का मानना है कि इसके लिए महाराष्ट्र सरकार ने भी हरी झंडी दे दी है।
1985 बैच के आईपीएस अधिकारी जायसवाल को पुलिसिंग का लंबा अनुभव रहा है। वह लंबे समय तक रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) से भी जुड़े रहे। कई महत्वपूर्ण मामलों की जांचों में भी शामिल रहे हैं। कई करोड़ रुपये के जाली स्टंप पेपर घोटाले की जांच करने वाले विशेष दल के वह प्रमुख थे। वह एटीएस में डीआईजी भी रह चुके हैं।
साल 2006 में हुए मालेगांव विस्फोट मामले की जांच भी जायसवाल ने ही की थी। यही नहीं, जायसवाल गढ़चिरौली के पुलिस अधीक्षक के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान एंटी-नक्सल ऑपरेशन्स के लिए भी चर्चित रहे। 22 सितंबर, 1962 को जन्मे सुबोध कुमार जायसवाल ने चंडीगढ़ के डीएवी कालेज से इंग्लिश से स्नातक किया और पंजाब यूनीवर्सिटी से एमबीए की डिग्री ली। वह 1985 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उनकी गिनती देश के योग्यतम आईपीएस अधिकारियों में की जाती है।