May 20, 2026
शिवहरे वाणी, D-30, न्यू आगरा, आगरा-282005 [भारत]
समाचार साहित्य/सृजन

दाऊजी मंदिर के सवालों के खिलाफ ‘ध्यान भटकाओ अभियान’; विश्व धरोहर दिवस पर अपनी विरासत के संरक्षण का लें संकल्प

आगरा।
कहते है कि झूठ अगर सौ मुंह से बोला जाए तो सच हो जाता है, लेकिन यह बात झूठ पर लागू होती है, सत्य पर नहीं। सत्य सदैव शांत, अटल और अचल रहता है, अपने स्पर्श भर से झूठ के पुलिंदों को तार-तार कर देता है।
व्हाट्सएप ग्रुप ‘शिवहरे समाज, आगरा’ पर चंद-चुनींदा लोगों ने दो दिन से शिवहरेवाणी के खिलाफ झूठा दुष्प्रचार मचा रखा है। हम चाहें तो जवाब दे सकते हैं लेकिन हम शिवहरे समाज की धरोहर दाऊजी मंदिर के प्रबंधन पर खड़े किए गए वाजिब सवालों से समाज का ध्यान भटकाने के इस नियोजित कुचक्र में फंसने वाले नहीं। हमारे सवाल अपनी जगह खड़े हैं, और सुधी समाजबंधुओं को मथ रहे हैं। हमें अनर्गल और आधारहीन बातों का जवाब देने की फुर्सत नहीं है, न इसकी जरूरत महसूस करते हैं क्योंकि, आज 18 अप्रैल है और हम ‘विश्व धरोहर दिवस’ सेलिब्रेट कर रहे हैं, एक ऐसा दिन जो दुनियाभर में ‘धरोहरों औऱ विरासतों’ के संरक्षण के प्रति जागरूकता जगाने के लिए मुकर्रर है।
इस उपलक्ष्य में समाजबंधुओं को शुभकामनाएं देते हुए आगरा में शिवहरे समाज की गौरवशाली धरोहर ‘दाऊजी मंदिर’ की बात करना हमारे लिए लाजिमी हो जाता है। आगरा में सदरभट्टी चौराहा स्थित दाऊजी मंदिर एक ऐसी अदभुत धरोहर जो आज 136 साल बाद भी शिवहरे समाज की पहचान और शान बनी हुई है। आगरा के 100 किलोमीटर की परिधि में दाऊजी मंदिर जैसी कोई इमारत नहीं है जहां लाल पत्थर पर इतना शानदार और महीन शिल्प मिलता हो। यहां तक कि दयालबाग जैसे स्मारक के निर्माण में फूल, बेल-बूटे समेत तमाम डिजायनें दाऊजी मंदिर के शिल्प से कॉपी की गई हैं। शिल्प-कला के छात्र इसका अध्ययन करने आते हैं। आज भी कोई कलाकार या शिल्प-पारखी पहली बार दाऊजी के सामने से गुजरता है तो नजर पड़ने पर ठिठक कर रह जाता है। हमने भी कई दफा लोगों को घंटों खड़े-खड़े दाऊजी मंदिर के मुख्यद्वार के आसपास पत्थर की दो मंजिला कलाकृतियों को एकटुक निहारते हुए देखा है।
किसी समाज के सभ्य होने की एक परख यह भी है कि अपनी धरोहरों के प्रति वह कितना सजग है, किस तरह उनका संरक्षण करता है। दाऊजी मंदिर जैसी कलात्मक धरोहर आगरा के शिवहरे समाज के इतिहास का आइना है, हमारे बुजुर्गों की प्रतिभा की गवाही है और वैचारिक समृद्धि की दस्तावेज है। याद दिला दें कि आजादी के बाद जब भारत सरकार ने पुरातत्व विभाग की स्थापना की, तो आगरा में अधिकारियों ने सर्वेक्षण कर दाऊजी मंदिर को सरकार के संरक्षण में लेने का निर्णय कर लिया था। लेकिन तब समाज के बुजुर्गों ने इस कलात्मक धरोहर के उचित संरक्षण का भरोसा देकर बड़ी मुश्किल से इसे सरकार के नियंत्रण में जाने से रोक लिया था। अब यदि हमने अपनी धरोहर की कलात्मकता के साथ छेड़छाड़ की या उसे संरक्षित नहीं किया, तो एक तरह से हम अपने ही बुजुर्गों को झूठा साबित करेंगे, उनकी आत्मा को शर्मिंदा करने का कुकृत्य करेंगे और अपनी ही अंतरात्मा के अपराधी बन जाएंगे। तो आइये, विश्व धरोहर दिवस पर हम अपनी धरोहर की रक्षा और संरक्षण का संकल्प लें, बुजुर्गों के प्रति कर्तव्य मानते हुए इसमें अपना योगदान करें।

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