July 27, 2026
शिवहरे वाणी, D-30, न्यू आगरा, आगरा-282005 [भारत]
समाचार समाज

भिंड के कलचुरी (शिवहरे) समाज में नहीं होगा मृत्युभोज; ऐतिहासिक पहल को प्रबुद्ध समाजबंधुओं का एकजुट समर्थन

भिंड।
भिंड के शिवहरे समाज से एक बड़ी खबर है। वहां समाज ने ‘मृत्युभोज’ बंद करने की ऐतिहासिक पहल की है। बीते रोज एक उठावनी के दौरान ‘भिंड शिवहरे समाज’ की ओर से यह प्रस्ताव रखा गया, जिसके पक्ष में वहां मौजूद लोगों ने एकजुट समर्थक व्यक्त किया। यही नहीं, प्रबुद्ध और जागरूक समाजबंधुओं ने लगे इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर लिखित सहमति भी प्रदान कर दी।

‘भिंड शिवहरे समाज’ के अध्यक्ष वीरेंद्र शिवहरे ने शिवहरेवाणी को यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि बीती 29 जून को स्व. श्री साहूकारजी शिवहरे की उठावनी गल्लामंडी के पीछे वाले चौक में हुई थी, जिसमें काफी संख्या में समाज जुटा था। इस दौरान अध्यक्ष वीरेंद्र शिवहरे ने यह प्रस्ताव शोक-संतृप्त परिवारीजनों के समक्ष रखा। खास बात यह है कि इस नेक पहल पर परिवारीजनों ने तो समहति व्यक्त की ही, वहां मौजूद समाजबंधुओं ने भी इस का भरपूर समर्थन किया। वीरेंद्र शिवहरे ने तत्काल एक लिखित प्रस्ताव तैयार कर उस कॉपी को हस्ताक्षर के लिए समाजबंधुओं के बीच चलवा दिया।

वीरेंद्र शिवहरे ने बताया कि समाज में मृत्युभोज बंदी की इस पहल में फिलहाल निम्न तीन बिंदु शामिल किए गए हैः-
सामूहिक भोज बंद होः-समाज में तेरहवीं पर होने वाले बड़े सामूहिक भोज की प्रथा को अब पूरी तरह बंद किया जाएगा।
केवल सात्विक व्यवस्था: शोक की घड़ी में केवल अत्यंत करीबी और बाहर से आए रिश्तेदारों के लिए ही सादे भोजन की व्यवस्था रहेगी।
भविष्य की ओर कदम:
इस फिजूलखर्ची से बचने वाले पैसे का उपयोग बच्चों की उच्च शिक्षा और समाज की उन्नति के लिए किया जाएगा।

अध्यक्ष ने बताया कि मृत्युभोज नहीं करने के संकल्प को समाज में लागू कराने के लिए बहुत जल्द एक बैठक कर व्यवहारिक कार्ययोजना तैयार की जाएगी। अभी तक योजना यह है कि किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के एक-दो दिन बाद या उठावनी पर ‘भिंड शिवहरे समाज की टीम’ शोक संतृप्त परिवार के पास जाएगी और मृत्युभोज नहीं करने का निवेदन करेगी। दूसरी तरफ, किसी भी मृत्युभोज में शामिल न होने का प्रेरक-संदेश भी समाज में प्रसारित किया जाएगा।

वीरेंद्र शिवहरे ने बताया कि बीते मार्च माह में ‘भिंड शिवहरे समाज’ का अध्यक्ष बनने के बाद से उनकी कार्यकारिणी समाज में मृत्युभोज को बंद कराने की योजना पर विचार कर रही थी। तय कर रखा था कि इसकी शुरुआत ऐसे परिवार से कराई जाएगी, जो सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय व प्रभावशाली हो, और अन्य परिवारों को भी प्रेरित करने में सक्षम हो। उन्होंने बताया कि स्व. साहूकारजी शिवहरे सामाजिक सेवा कार्यों में हमेशा सक्रिय रहे, उनके पुत्र मनोज शिवहरे ‘भिंड शिवहरे समाज’ के पूर्व युवा अध्यक्ष रहे हैं और भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष भी थे। यही वजह रही कि स्व. श्री साहूकारजी शिवहरे की उठावनी में पहली बार यह प्रस्ताव रखा गया।

भिंड के शिवहरे समाज में मृत्युभोज बंद करने की यह पहल कहां तक सफल रहेगी, यह तो वक्त बताएगा लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि सदियों से चली आ रही मृत्युभोज की परंपरा मानवीय अधिकारों, गरिमा और समानता के खिलाफ है। किसी भी परिवार पर दुख की घड़ी में आर्थिक बोझ डालना इंसानियत नही है। इसे हर हाल में बंद होना चाहिए, केवल भिंड ही क्यों…सभी जगह!

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