जयपुर।
वरिष्ठ समाजसेवी श्री शिवचरणजी हाडा ने 20 जुलाई को जीवन के 81 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। इस मौके पर कलचुरी समाज के ज्यादातार सोशल मीडिया ग्रुपों में जयपुर की इस प्रेरणादायी शख्सियत के लिए बधाई संदेश चल रहे हैं। यह लोकप्रियता और सम्मान ही श्री हाडा के समर्पित सामाजिक जीवन का सुफल है।
श्री हाडा की शख्सियत और उनका पूरा जीवन अपने आपमें एक प्रेरणा है। ‘एक हाथ से’ जीवन की चुनौतियों के साथ ‘दो-दो हाथ किए’, सरकारी ओहदे की व्यस्तताओं में से समय निकालकर कलचुरी समाज के एकीकरण के लिए दूर-दूर की यात्राएं कीं, समाज की तन-मन-धन से सेवा की। और, अब 81 की आय़ु में भी सामाजिक कार्यों के लिए उनकी ऊर्जा और तत्परता निश्चय ही आज के युवाओं में दम भरती है।
श्री हाडा के जीवन की संघर्ष-गाथा साबित करती है कि अगर मन में कुछ करने की चाहत और मजबूत इरादे हों तो अंसभव कुछ भी नहीं। महज 12 साल की आय़ु में एक हादसे में उनका दायां हाथ कट गया। पढ़ना-लिखना तो दूर, जीवन के रोजमर्रा के काम करना तक मुश्किल हो गया था। ऐसी स्थिति में बड़े-बड़े जिगर वाले लोग भी हौसला खो बैठते हैं, जबकि हाडाजी तो उस वक्त बच्चा ही थे। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। बायें हाथ से जीना सीखा, खूब पढ़े-लिखे औऱ आयकर अधिकारी बने। जीवन के इन संघर्षों ने उनके व्यक्तित्व को विनम्रता, सहजता और सरलता के गहनों से सजा दिया। उन्होंने अपने जीवनभर एक हाथ से दो हाथ बराबर काम किए, एक हाथ से दो हाथ बराबर सेवा की, एक हाथ से दो हाथ बराबर दान दिया।
एक मायने में यह कहना गलत नहीं कि, आज कलचुरी समाज में यह सर्वविदित हो पाया कि हमारे सैकड़ों उपनामों में एक उपनाम ‘हाडा’ भी है, तो इसका बहुत कुछ श्रेय भी हाडाजी के सेवाकार्यों और सामाजिक क्षेत्र में उनकी ख्याति को जाना चाहिए। सेवा के भाव श्री हाडा को अपने परिवार से मिले। हैं। उनके पिता सेठ श्री रघुनाथजी हाडा बस्सी (जयपुर) के बड़े कपास कारोबारी होने के साथ एक प्रतिष्ठित समाजसेवी भी थे। श्री शिवचरण हाडा ने पिता के सानिध्य में इंटरमीडियेट तक की पढ़ाई बस्सी से ही की, इसके बाद जयपुर में महाराजा कालेज से बीए किया, राजस्थान यूनीवर्सिटी से एमए, एलएलबी की, जिसके बाद आयकर विभाग में अपर डिविजनल क्लर्क के पद पर उनका चयन हो गया। उन्होंने नौकरी करने के साथ-साथ एलएलएम भी कर लिया। औऱ, इसी दौरान कलचुरी समाज की सेवा में सक्रिय हो गए और आज तक जारी है।
श्री हाडा की जीवनसंगिनी श्रीमती इंदुबाला 54 वर्षों का साथ निभाने के बाद दो वर्ष पूर्व स्वर्गवासी हो गई थीं। श्रीमती हाडा अपने जीवन के अंतिम नौ वर्ष वह डिमेंशिया से पीड़ित रहीं, और अंतिम चार वर्ष तो कोमा में बीते। श्री हाडा ने पत्नी की सेवा-सुश्रुषा में भी कोई कमी नहीं छोड़ी। सेवा दरअसल प्रेम की ही अभिव्यक्ति होती है। प्रेम बिना किसी स्वार्थ के, दूसरों की भलाई के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है, और यह प्रेरणा ही सेवा का रूप लेती है। ये प्रेम ही श्री हाडा के जीवन का फलसफा है, और इसी की जीती-जागती मिसाल हैं वह। आज उनके 81वें जन्मदिन पर हम उन्हें बधाई देते हुए उनकी बेहतर सेहत और दीर्घायु की कामना करते हैं।
समाचार
साहस और सेवा की मिसाल हैं शिवचरण हाडा; 81वें जन्मदिन पर विशेष
- by shivhare vaani
- July 19, 2026
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- 1 minute ago












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