October 25, 2026
शिवहरे वाणी, D-30, न्यू आगरा, आगरा-282005 [भारत]
समाचार साहित्य/सृजन

महर्षि वाल्मीकि को नमन! जिनकी रामकथा में है भगवान सहस्रबाहु की महिमा का गुणगान

—-महर्षि वाल्मीकि जयंती पर विशेष—-
आज शरद ऋतु, अश्विन मास की पूर्णिमा। रामायण के रचयिता, आदिकवि, संस्कृत के ज्ञानी, महर्षि वाल्मीकि जी जिन्होंने सनातन हिंदू धर्म के पावन ग्रंथ रामायण में हमारे पूर्वज, हैहयवंश के कुलदीपक और हमारे आराध्य राजराजेश्वर भगवान अर्जुन कार्तवीर्य/सहस्रार्जुन/ सहस्रबाहु के क्षात्रतेज, वीरता का गुणगान और दशानन रावण को बंदी बनाने के प्रसंग को रामकथा के साथ ही विश्व में अमर कर दिया।
अर्जुन कार्तवीर्य/सहस्रार्जुन/सहस्रबाहु का उल्लेख मूल वाल्मीकि रामायण में मुख्य रूप से उत्तरकांड के 31 वें और 32 वें सर्ग में किया गया है जिसमें सहस्रार्जुन और रावण के बीच हुए भीषण युद्ध की कथा आती है। भगवान श्री राम द्वारा दशानन रावण की लंका विजय और श्रीराम के राज्याभिषेक के बाद जब महर्षि अगस्त्य अयोध्या आते हैं, तब वे श्रीराम को रावण का पूर्व इतिहास और उसके अहंकार के टूटने की कथाएं सुनाते हैं। अगस्त्य मुनि भगवान श्रीराम को लंकेश दशानन रावण के जीवन और उस पर भगवान श्री सहस्रार्जुन की जीत की कथा बताते हुए इस घटना का उल्लेख करते हैं।
इस कथा में पुण्य सलिला माँ नर्मदा तट के प्रसंग इस प्रकार है। लंकापति रावण दिग्विजय यात्रा पर निकला था और नर्मदा नदी के तट पर शिवलिंग बनाकर पूजन कर रहा था। उसी समय माहिष्मती के महराजा सहस्रार्जुन अपनी रानियों के साथ नदी में जलक्रीड़ा कर रहे थे और उन्होंने अपनी हजार भुजाओं से नर्मदा के प्रवाह को रोक दिया था। इससे नदी का पानी उलटी दिशा में तटबंध के ऊपर से बहने लगा और नर्मदा के तट पर रावण की पूजा सामग्री बह गई। इससे क्रोधित होकर रावण ने सहस्रार्जुन को युद्ध के लिए ललकारा। इस युद्ध में सहस्रार्जुन ने रावण को बुरी तरह परास्त किया और उसे बंदी बनाकर अपने कारागार में डाल दिया। बाद में, रावण के दादा महर्षि पुलस्त्य के हस्तक्षेप और अनुरोध पर सहस्रार्जुन ने रावण को बंधन मुक्त किया और उससे मित्रता कर ली।
आज वाल्मीकि जी की जयंती पर सादर नमन।
(समाचार के साथ दिया गया चित्र भारत सरकार द्वारा महर्षि वाल्मीकि पर जारी डाक टिकट का है।)
पवन नयन जायसवाल
राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष- अखिल भारतीय जायसवाल (सर्ववर्गीय) महासभा
संयोजक- भगवान श्री सहस्रार्जुन जन्मोत्सव जागरुकता अभियान
सुसंवाद, संदेश- 94217 88630
अमरावती, विदर्भ, महाराष्ट्र

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

समाचार, समाज

राधाकृष्ण मंदिर में पहली बार महिलाओं ने किया स्वरूपों

शिक्षा/करियर, समाचार

बड़ी उपलब्धिः स्टॉकएड के सीईओ देवांश शिवहरे बने आगरा

समाचार

जसरानाः श्री विनोद शिवहरे की उठावनी 23 अक्टूबर को

समाचार, समाज

लोहामंडी की शिवहरे गली से विदा हुई नौ दिनों

समाचार, समाज

झांसी में कलचुरी समाज ने विजयदशमी पर किया ‘शस्त्र-पूजन’;

Uncategorized, समाचार

श्रीमती कमला देवी (पत्नी स्व. श्री मुरारीलाल गुप्ता ‘शिवहरे’)