आगरा।
आगरा में शिवहरे समाज की धरोहर राधाकृष्ण मंदिर में विजयदशमी पर हर साल की तरह इस बार भी एक गौरवशाली परंपरा का पूरी शिद्दत से निर्वहन किया गया जो बुजुर्गों के प्रति सम्मान की जीती-जागती मिसाल है।
जटपुरा स्थित राममंदिर से निकलने वाली भव्य शोभायात्रा में भगवान राम, लक्ष्मण, हनुमान और उनके साथ वानर सेना के स्वरूपों ने मंदिर परिसर में ‘अनिवार्य’ विश्राम लिया। मंदिर प्रबंध समिति के पदाधिकारियों ने स्वरूपों की आरती की, मेवा-दूध से स्वागत किया और भेंट देकर श्रद्धापूर्वक विदा किया। खास बात यह रही कि मंदिर के 63 साल के इतिहास मे पहली दफा ऐसा हुआ है जब समाज की महिलाओं ने भी स्वरूपों का बढ़-चढ़कर स्वागत किया। शिवहरे युवा कमेटी के सदस्यो ने भी मंदिर के बाहर स्वरूपों की आरती की।
बप्पू की इच्छा का रखा मान तो शुरू हुई परंपरा
दरअसल, इस परंपरा की नींव स्व. श्री चिरंजीलालजी शिवहरे ‘ईंट-भट्टे वाले’ के एक आदेश से पड़ी थी और 1962 से चली आ रही है। इसी साल चिरंजीलालजी शिवहरे द्वारा दान की गई जमीन पर मंदिर निर्माण बना था। चिरंजीलालजी लोकप्रिय समाजसेवी थे, लोग उन्हें ‘बप्पू’ कहा करते थे। पूरे लोहामंडी क्षेत्र के लोगों के मन में उनके लिए इतना आदर था कि उनकी कोई बात, सुझाव या कोई इच्छा उनके लिए आदेश बन जाती थी। बुजुर्गों के मुताबिक, मंदिर निर्माण के बाद पहले दशहरे पर बप्पू ने जटपुरा के राममंदिर से निकलने वाली शोभायात्रा के प्रबंधकों से इच्छा जाहिर की, कि नवनिर्मित राधाकृष्ण मंदिर में शोभायात्रा को विश्राम दिया जाए। शोभायात्रा के प्रबंधकों के लिए मुश्किल खड़ी हो गई। क्योंकि सालों से यह शोभायात्रा जटपुरा मंदिर से शुरू होती तो कहीं विश्राम किए बिना क्षेत्र का भ्रमण करते हुए सेंट चौराहा पहुंचती थी और शोभायात्रा में शामिल भगवान के स्वरूप कहीं भी कहीं विश्राम नहीं लेते थे। लेकिन, अब बप्पू के कहे को कौन टाल सकता था भला। लिहाजा उस साल पहली बार यह शोभायात्रा राधाकृष्ण मंदिर परिसर में रुकी। तब से अब तक 62 साल हो गए। लेकिन आज भी बप्पू के ‘आदेश’ का अनुपालन हो रहा है।
मंदिर कमेटी ने दूध-मेवा से किया यात्रा का स्वागत
20 अक्टूबर को दशहरे पर शाम 7 बजे जटपुरा से शोभायात्रा शुरू हुई जिसमें 50 से ज्यादा झांकियां थीं। शोभायात्रा की सबसे आखिरी झांकी में राम-लक्ष्मण और हनुमानजी रथ पर सवार थे, जिसके आगे वानर सेना रावण की राक्षसी सेना से युद्ध करती चल रही थी। रात करीब 10 बजे यह झांकी राधाकृष्ण मंदिर पहुंची तो मंदिर अध्यक्ष अरविंद गुप्ता और महासचिव मुकुंद शिवहरे भगवान के स्वरूपों को रथ से उतारकर मंदिर में अंदर लेकर आए, जहां विशेष आसन पर उन्हें बिठाकर उनकी पूजा अर्चना की। शिवहरे युवा कमेटी के सदस्यों और आलमगंज की स्वजातीय महिलाओं ने भी भगवान की पूजा-अर्चना की। भगवान के स्वरूपों, वानर सेना व राक्षसी सेना के स्वरूपों और शोभायात्रा के पदाधिकारियों का स्वागत गरम-गरम मेवा-दूध से किया गया। यहां कुछ देर विश्राम के बाद स्वरूप प्रस्थान करने लगे तो उन्हें लिफाफे में भेंट प्रदान कर विदा किया गया। इससे पूर्व शोभायात्रा में शामिल काली माता के स्वरूप को शिवहरे गली मे लाया गया, जहां दुर्गा पंडाल ें उनकी आरती की गई।
स्वागत सत्कार करने वालों में ये रहे शामिल
स्वागत करने वालों में मंदिर पदाधिकारियों के अतिरिक्त शिवहरे युवा कमेटी के तुषार गुप्ता तनु, अमित गुप्ता गोल्डी, हर्ष गुप्ता (कपिल डेयरी), यश गुप्ता, पीयूष गुप्ता, अभिजीत गुप्ता, सिद्धार्थ गुप्ता, अमित शिवहरे कालू, तरुण शिवहरे, रिषभ गुप्ता शामिल रहे। स्वागत करने वालों में दीपा गुप्ता, पूनम गुप्ता, रजनी गुप्ता, उर्मिला गुप्ता, राधा गुप्ता, शिल्पी गुप्ता, दिव्या गुप्ता, समेत कई महिलाएं भी शामिल रहीं।
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राधाकृष्ण मंदिर में पहली बार महिलाओं ने किया स्वरूपों का स्वागत; दशहरा की 63 वर्ष पुरानी परंपरा में नया अध्याय
- by admin
- October 22, 2026
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