अंबिकापुर।
श्री कौन्तेय जायसवाल के आकस्मिक निधन के दुखद समाचार से कलचुरी समाज स्तब्ध है। अभी एक पखवाड़े पहले ही कौन्तेयजी ने शिवहरेवाणी को फोन कर पोर्टल पर रायगढ़ (छत्तीसगढ़) का एक समाचार प्रकाशित करने के लिए आभार व्यक्त करते हुए आगामी नवंबर माह में रायपुर में होने वाले सेमिनार में आमंत्रित किया था। क्या पता था कि कलचुरी वंश के इतिहास के अनसुलझे सवालों के जवाब खोजने के लिए जगह-जगह की खाक छान रहे कौन्तेयजी का सफर अचानक थम जाएगा।
शुक्रवार, 4 सितंबर की शाम करीब 6 बजे उनके निधन की मनहूस खबर सोशल मीडिया पर सामने आई। पता चला कि अंबिकापुर (छत्तीसगढ़) में अपने निवास पर शाम चार बजे गले में बिस्कुट अटकने से उनका दम घुट गया। परिवारीजन उन्हें अस्पताल ले गए जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अहमदाबाद के युवा सोशल वर्कर श्री अनिल जायसवाल ने बताया है कि श्री कौन्तेय जायसवाल की अंतिम यात्रा शनिवार, 5 सितंबर को उनके निवास से स्थानीय मोक्षधाम के लिए प्रस्थान करेगी जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
श्री कौन्तेय जायसवाल को कलचुरी राजवंश के सही इतिहास सामने लाने की धुन लगी थी। वह लंबे समय से छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के उन इलाकों की खाक छान रहे थे, जो कलचुरी राजवंश के आधीन थे। हालांकि छत्तीसगढ़ में कौन्तेयजी की एक पहचान सफल उद्योगपति की भी थी। शारदा फूड इंडस्ट्रीज के नाम से उनका मसालों का कारोबार है जिसके जायका ब्रांड मसाले छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में काफी लोकप्रिय है। हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार ने कौन्तेय जी को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग फेस्टिलेशन कौन्सिल का सदस्य नियुक्त किया था। 66 वर्षीय कौन्तेय जायसवाल अपने पीछे धर्मपत्नी एवं दो विवाहित पुत्रों के भरे-पूरे परिवार को बिलखता छोड़ गए हैं।
महाराष्ट्र में अमरावती के जाने-माने समाजसेवी, बुद्धीजीवी एवं साहित्यकार श्री पवन नयन जायसवाल ने श्री कौन्तेय जायसवाल के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि कौन्तेयजी ने बड़ी मेहनत से भगवान श्री सहस्रार्जुन और कलचुरी वंश से संबंधित विपुल जानकारी एकत्र की थी। तमाम साक्ष्य, अनगिनत शिलालेखों और तामपत्रों की जानकारी व चित्र उनके पास थे। वह हर उस जगह जाते थे जहां कलचुरी वंश से संबंधित कोई ऐतिहासिक साक्ष्य मिलने की संभावना होती। एक तरह से इन जगहों की यात्रा करने को अपने जीवन का ध्येय बना लिया था। उनकी दृष्टि छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से आगे बढ़कर उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के कलचुरी वंश के इतिहास तक थी।
श्री पवन नयन जायसवाल ने शिवहरेवाणी को बताया कि ‘कौन्तेय जी से मेरी अक्सर बात होती थी। उनकी योजना कलचुरी वंश के इतिहास पर सभी एकत्र प्रमाणों और साक्ष्यों के साथ चार खंडों में करीब 600 पृष्ठ का एक ग्रंथ प्रकाशित करने की थी। जबकि, मेरी राय थी कि सारे खंड एकसाथ प्रकाशित न कर एक-एक खंड का प्रकाशन कराते जाइये। काश वह मेरी बात मान लेते तो शायद एक-दो खंड प्रकाशित हो चुके होते। अब उनके दुर्लभ शोधकार्य को संकलित औऱ क्रमबद्ध कर पाना किसी के लिए भी आसान नहीं होगा। उनकी आकस्मिक मृत्यु समाज के लिए अपूर्णनीय क्षति है।
वाराणसी के समाजसेवी एवं बुद्धिजीवी श्री राधेश्याम जायसवाल ने शिवहरेवाणी से बातचीत में कहा कि श्री कौन्तेय जायसवाल एक बड़ी योजना पर काम कर रहे थे। बीते वर्ष उन्होंने कलचुरी राजवंश के इतिहास को लेकर एक सेमिनार कठघोरा में कराया था। आगामी नवंबर को रायपुर में दूसरा सेमिनार कराने वाले थे। इसके बाद वह गुजरात, असम और गोरखपुर में भी सेमिनार कराना चाहते थे। उन्होंने कलचुरी राजवंश के इतिहास को नए सिरे से लिखने की ठान ली थी। इसके लिए वह लंबे समय उस दौर के ताम्रपत्रों, शिलालेखों और अन्य पुरातात्विक साक्ष्यों का अध्ययन कर रहे थे।
श्री कौन्तेय जायसवाल प्रखर वक्ता भी थे। मंचों से अपनी बात को मजबूती से कहने का हुनर रखते थे, जिसके चलते उन्हें सुना जाता था। लेकिन, अब बस इतना ही कह सकते हैं-
बड़े गौर से सुन रहा था जमाना,
तुम ही सो गए दास्तां कहते कहते।
समाचार
श्री कौन्तेय जायसवाल का आकस्मिक निधन; कलचुरी समाज स्तब्ध; …तुम ही सो गए दास्तां कहते कहते
- by admin
- September 4, 2026
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