आगरा।
लोहामंडी की शिवहरे गली शारदीय नवरात्र के नौ दिन गुलजार रहने वाले बाद दशहरा (20 अक्टूबर) के दिन मां दुर्गा की विदाई के साथ मानो सूनी हो गई हो। सुबह शिवहरे महिलाओं ने ‘सिंदूर खेला’ की ‘बंगाली रस्म’ निभाते हुए दुर्गा का आशीर्वाद लिया और सुंदर श्रृंगार कर उन्हें पिता के घर (दुर्गा पंडाल) से ससुराल के लिए विदा किया। विदाई की वेला में आलमगंज के शिवहरेजन खासकर महिलाएं व बच्चे भावुक नजर आए। शिवहरे युवा कमेटी लोहामंडी के सदस्यों ने पवित्र यमुना नदी में माता की प्रतिमा को विसर्जित किया।
शिवहरे गली में पूरे नौ दिन पूरी उमंग और उत्साह के साथ धर्म व संस्कृति का उत्सव मनाया जिसमें महिलाओं और बच्चों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों से अपनी प्रतिभा को सामने रखा। एक दिन पहले नवमी को माता के हवन-यज्ञ के बाद कन्या-भोज एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया गया था जो रात आरती होने तक जारी रहा। जबकि, पंडाल में अष्टमी की रात को शिवहरे समाज के युवाओं और बच्चों ने देवी-देवताओं के स्वरूप बनकर एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दीं।
अष्टमी की रात को झांकियों के दर्शन
रविवार अष्टमी की रात भगवान शिव की झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। इस प्रस्तुति में सॉफ्टवेयर इंजीनियर यश गुप्ता ने भगवान शिव का किरदार किया, जबकि गगन और आकाश मन्नू ने अघोरी की भूमिका की। इनके अलावा काली माता की प्रस्तुति भी शानदार रही, जिसमे कुस्सू ने काली मां की भूमिका की जबकि रोशन ‘ओम’ और तरुण ‘तनु’ ने असुरों का रोल किया जिनका मर्दन झांकी में काली मां द्वारा दिखाया गया। लेकिन इस रात की सबसे बड़ी प्रस्तुति थी भगवान विष्णु के दस अवतारों की झांकी। इनमें सुश्री समृद्धि ने भगवान विष्णु एवं श्रीकृष्ण अवतार की भूमिका की। निखर ने रामअवतार, सताक्षी ने मत्स्य अवतार, शुद्धि ने कूर्म अवतार, मिलान ने वराह अवतार, अथर्व ने नरसिंह अवतार और हनुमानजी, रसिका ने परशुराम, एलेक्स ने वामन अवतार, अनी ने बुद्ध अवतार, पिहू ने कल्कि अवतार की भूमिका की। एंजेल ने राधाजी, अमित ने सुदामा, रुद्र ने वरुण, मोहन ने रावण, लव ने वानर सेना की भूमिका की। मंच संचालन गौतन शिवहरे ने किया, जबकि नृत्य निर्देशन 14 वर्षीय होनकार कलाकर पिहू ने किया। झांकियों की प्रस्तुति का क्रम आधीरात तक चला।
नवमी की सुबह हवन-यज्ञ और भंडारा
सोमवार नवमी की सुबह पंडाल के मुख्य व्यवस्थापक अमित गुप्ता (गोल्डी) और शिवहरे युवा कमेटी के सभी सदस्यों ने देवी मां के हवन-यज्ञ में भाग लिया, जिसके बाद कन्या पूजन किया गया। राधाकृष्ण मंदिर के बेसमेंट हॉल में कन्याओं को भोजन-दक्षिणा के बाद अटूट भंडारा देर रात संध्या आरती तक चलता रहा जिसमें सैकड़ों समाजबंधुओं ने दिव्य प्रसादी का आनंद लिया।
देवी मां को सुंदर श्नृंगार कर किया विदा
मंगलवार को दशहरा की सुबह माता का सुंदर श्रृंगार कर विदाई के लिए तैयार किया गया। इसके बाद मां की आरती हुई जिसमें आलमगंज के ज्यादातर शिवहरे परिवार उपस्थित रहे, और फिर पंडाल में महिलाओं ने माता को सिंदूर लगाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। महिलाओं ने ‘सिंदूर खेला’ की बंगाली परंपरा के अनुरूप ढोल की थापों पर नाचते-गाते एक-दूसरे को सिंदूर और गुलाल लगाया। इसी उत्साह के साथ माता को गली से बाहर लाया गया जिसके बाद उन्हें मेटाडोर पर बिठाकर विदा किया गया। शिवहरे युवा कमेटी लोहामंडी के युवकों ने यमुना नदी लेकर जाकर प्रतिमा का विसर्जन किया।
मान्यता है कि दुर्गा मां शारदीय नवरात्र के नौ दिन पिता के घर आती हैं और फिर ससुराल के लिए प्रस्थान करती हैं। दुर्गा पंडाल को दुर्गा मां के पिता का घर माना जाता है। अगर इसके इतिहास पर नजर डालें तो बताया जाता है करीब 450 वर्ष पहले इस परंपरा का आरंभ बंगाल में हुआ था। पिछले कुछ वर्षों में उत्तर भारत में गणेश चतुर्थी की तरह ही दुर्गा पंडाल की परंपरा भी काफी प्रचलन में आ चुकी है।
शिवहरे गली में शारदीय नवरात्र में दुर्गा पंडाल का यह लगातार चौता आयोजन था। इसकी शुरुआत वर्ष 2023 में की गई थी। शिवहरे युवा कमेटी के सदस्य जिस सकारात्मक ऊर्जा के साथ गीत, संगीत, नाट्य कला समेत क्रियेटिव आर्ट्स का प्रदर्शन करते हैं, अतिश्योक्ति नहीं कि आने वाले दिनों में शिवहरे गली का दुर्गा पंडाल आगरा में वह प्रतिष्ठा प्राप्त कर ले जो कभी राधाकृष्ण मंदिर के जन्माष्टमी महोत्सव को हासिल थी।
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लोहामंडी की शिवहरे गली से विदा हुई नौ दिनों की रौनक; दुर्गा पंडाल में अष्टमी देर रात तक झांकियों का दौर, नवमी पर दिनभर चला भंडारा
- by admin
- October 21, 2026
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