August 25, 2026
शिवहरे वाणी, D-30, न्यू आगरा, आगरा-282005 [भारत]
समाचार

बहू का कन्यादान, बेटे की मौत के बाद ससुराल ने कराई दूसरी शादी, विदाई पर हर आंख भर आई

शिवहरे वाणी नेटवर्क
बलौदाबाजार (छत्तीसगढ़)। 
बहु और बेटी के बीच फर्क न मानने की दुहाई तो बहुत लोग देते हैं, लेकिन रूढ़ियों को तोड़ने का साहस कुछ ही कर पाते हैं। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में सास-ससुर और बहू के रिश्ते एक ऐसी ही मिसाल सामने आई है। सास-ससुर ने अपने घर से विधवा बहू का कन्यादान कर उसके सूने जीवन में रंग भर दिए। सुसराल की चौखटे से बहू की विदाई के क्षण इतने भावुक थे कि वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं।  
किस्सा है बलौदाबाजार जिले के सेल गांव का। इस गांव के रहने वाले मनीराम जायसवाल जिले की लवन नगर पंचायत के सीएमओ पद पर तैनात हैं। उन्होंने पांच वर्ष पहले अपने बड़े बेटे रामेश्वर प्रसाद जायसवाल का विवाह रेश्मा जायसवाल से किया था। उस वक्त रेश्मा 22 वर्ष की थी। रेश्मा को ससुराल में बेटी जैसा प्यार मिला। लेकिन, दुर्भाग्य ने उसकी खुशियां छीन लीं, जब 27 जुन 2018 को उसके पति रामेश्वर की अचानक मृत्यु हो गई । 
बेटे की अर्थी उठाने के सबसे भारी बोझ ने मनीराम जायसवाल को तोड़ कर रख दिया। परिवार पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा। मनीरामजी और उनकी पत्नी ने बहुत मुश्किल से खुद को संभाला और विधवा बहू रेश्मा को सहारा दिया, एक बेटी तरह उसका ख्याल रखने लगे। रेश्मा भी बेटी की तरह ही सास-ससुर की सेवा करती थी। 
मनीरामजी से बहू रेश्मा का अकेलापन देखा न गया और उन्होंने उसकी दोबारा शादी कराने की ठान ली। इस पर परिवार के लोग भी राजी हो गए और वे सब रेश्मा के लिए योग्य वर की तलाश में जुट गए। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के सिरपुर गांव निवासी पवन कुमार चौकसे से रेश्मा का रिश्ता कर दिया गया। बीती 24 अगस्त को मनीरामजी के गांव सेल में रेश्मा और पवन का विवाह हो गया। 
रेश्मा को विदा करते समय मनीरामजी और उनका परिवार बिलख पड़ा। परिवार ने रेश्मा से कहा- बेटी तुने जैसे हमें संभाला है वैसे ही अपने नए ससुराल को संभालना। सेल तेरा मायका है और हम तेरे माता-पिता..हमें भुल मत जाना। विदाई के इन भावुक क्षणों में वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं। 
 

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