April 20, 2026
शिवहरे वाणी, D-30, न्यू आगरा, आगरा-282005 [भारत]
समाचार

भगवान कृष्ण का छठी महोत्सव दाऊजी मंदिर में 4 सितंबर तो राधाकृष्ण मंदिर में 5 सितंबर को, इसलिए अलग-अलग दिन हो रहा है आयोजन

आगरा
जैसा कि हर बच्चे के जन्म के छठवें दिन छठी का आयोजन होता है, वैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के बाद अब छठी महोत्सव की बारी है। आगरा में शिवहरे समाज की प्रमुख धरोहर दाऊजी मंदिर में शनिवार 4 सितंबर को भगवान श्रीकृष्ण के छठी महोत्सव का आयोजन होगा। जबकि समाज की दूसरी प्रमुख धरोहर राधाकृष्ण मंदिर में इसके अगले दिन रविवार 5 सितंबर को ठाकुरजी की छठी मनाई जाएगी। ऐसा संभवतः पहली बार हो रहा है कि समाज की दोनों धरोहरों में भगवान की छठी अलग-अलग दिन मनाई जा रही है। 
दाऊजी मंदिर प्रबंध समिति की ओर से शिवहरेवाणी को बताया गया है कि 4 सितंबर को शाम छह बजे से मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण का छठी महोत्सव होगा, जिसमें लड्डूगोपाल का पूजन कर कड़ी-चावल का प्रसाद वितरित किया जाएगा। प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्री बिजनेश शिवहरे ने अपनी कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों के साथ ही शिवहरे समाजबंधुओं से छठी महोत्सव का हिस्सा बन भगवान का प्रसाद पाने का अनुरोध किया है। 
वहीं राधाकृष्ण मंदिर में रविवार 5 सितंबर को छठी महोत्सव पर शाम 5 बजे से राधाकृष्ण महिला समिति की सदस्यायें मंदिर में मंगल कीर्तन करेंगी। शाम 6.30 बजे कड़ी चावल का भोग लगाकर प्रसाद वितरित किया जाएगा। राधाकृष्ण मंदिर समिति के महासचिव श्री मुकुंद शिवहरे के मुताबिक, यह परंपरा रही है कि नवजात यदि लड़का है तो उसकी छठी शनिवार के दिन नहीं मनाई जाती है। इसी का अनुसरण करते हुए मंदिर में रविवार को छठ मनाने का निर्णय किया गया है। समिति के अध्यक्ष श्री अरविंंद गुप्ता ने  समाजबंधुओं से रविवार शाम 6.30 बजे मंदिर में ठाकुरजी के छठी महोत्सव भाग लेने की अपील की है। 
364 दिन बाद मनाई गई थी श्रीकृष्ण की छठी
श्रीकृष्ण का जन्म कंस के कारागार में हुआ था। उस रात तेज बारिश हो रही थी। कारागार के समस्त प्रहरी सो गए। वासुदेव ने श्रीकृष्ण को रातोंरात गोकुल में नंद के घर पहुंचा दिया। कंस जब कारागार में आया तो उसको बताया गया कि लड़की का जन्म हुआ है। कंस ने उसको मारने की कोशिश की लेकिन वह यह कहते हुए आकाश में बिजली बन गई कि तुझे मारने वाला तो जन्म ले चुका है। कंस ने पूतना को आदेश दिया कि जितने भी छह दिन के बच्चे हैं, उनको मार दिया जाए। पूतना जब गोकुल पहुंची तो यशोदा ने बालकृष्ण को छिपा दिया। बालकृष्ण को छह दिन हो गए थे। लेकिन उनकी छठी नहीं हुई, और ना ही नामकरण हुआ। यशोदा ने कान्हा के जन्म से 364 दिन बाद सप्तमी को छठी पूजन किया। 
 

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