भिंड।
भिंड के शिवहरे समाज इस बार सावन को यादगार विदाई देने की तैयारी में है। रक्षाबंधन के अगले दिन यानी 29 मई की शाम को शिवहरे समाजबंधु, महिलाएं व बच्चे ‘भुजरिया मिलन समारोह’ के बहाने संस्कृति मैरिज गार्डन में एकत्र होंगे जहां उनके लिए झूले व मनोरंजक गेम्स के इंतजाम के साथ भजन संध्या का आयोजन भी किया गया है। इस खुशनुमा शाम का समापन सहभोज के साथ होगा।

शिवहरे समाज भिंड के अध्यक्ष वीरेंद्र शिवहरे ने शिवहरेवाणी को यह जानकारी देते हुए बताया कि भिंड में पहली बार शिवहरे समाज की ओर से ‘भुजरिया मिलन समारोह’ का आयोजन किया जा रहा है जिसकी रूपरेखा बीती 21 अगस्त को हुई बैठक में तय कर दी गई थी। उन्होंने बताया कि भुजरिया मिलन समारोह 29 अगस्त को संस्कृति मैरिज गार्डन में शाम तीन बजे से शुरू होगा जिसमें नगर के सभी समाजबंधु परिवार समेत आमंत्रित हैं। महिलाओं के लिए पारंपरिक रस्सी वाले झूलों की व्यवस्था की गई है, वहीं कुछ स्टैंड वाले झूले भी लगाए जाएंगे। भजन संध्या होगी जिसके लिए आगरा से एक म्यूजिक पार्टी बुलाई गई है। शाम करीब 7 बजे से ड़िनर शुरू होगा।

वीरेंद्र शिवहरे ने बताया कि भुजरिया मिलन समारोह का आयोजन सामाजिक मिलन के उद्देश्य से किया जा रहा है। ताकि, इस बहाने शिवहरे समाज एक जगह एकत्र हो और एकजुटता की भावना से सामाजिक उत्थान की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को बल प्रदान करे। ‘शिवहरे समाज भिंड’ के सभी पदाधिकारियों व सदस्यों ने जनपद के सभी शिवहरे परिवारों को इस आयोजन में भाग लेने का विनम्र अनुरोध किया है। 21 अगस्त को हुई बैठक में रमन शिवहरे, सचिन शिवहरे, संतोष शिवहरे, राहुल शिवहरे, रामकुमार शिवहरे, अवधेश शिवहरे, दिलीप शिवहरे, भूरा शिवहरे, पवन शिवहरे, राजकुमार गुप्ता, शिवप्रताप शिवहरे, चंद्रप्रकाश शिवहरे, बालकराम शिवहरे, मनोज शिवहरे, शानू शिवहरे मौजूद रहे।
क्या होता है भुजरिया मिलन
भुजरिया मिलन मुख्य रूप से मध्य प्रदेश (विशेषकर बुंदेलखंड और महाकौशल क्षेत्र) में रक्षाबंधन के आसपास मनाया जाने वाला सांस्कृतिक पर्व है। इसे कजलिया मिलन भी कहते हैं। दरअसल सावन मास में मिट्टी या बालू में बोए गए गेहूं या जौ के हरे-भरे पौधे (अंकुर) को भुजरिया या कजलिया कहा जाता है। परंपरा तो यह है कि इस दिन लोग एक-दूसरे को भुजरिया भेंट करते हैं, गले मिलते हैं और बड़े-बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं। [ वैसे ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाए तो भुजरिया मेला या भुजरिया मिलन समारोह महोबा के प्रसिद्ध वीर योद्धा आल्हा और ऊदल की ऐतिहासिक कथाओं और उनके सम्मान से भी जुड़ा हुआ है।














