June 19, 2026
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समाचार समाज

राय महिला मंडल ग्वालियर ने श्रद्धाभाव से मनाया भगवान दत्तात्रेय का जन्मोत्सव; कलचुरी समाज की ‘गुरु-पूर्णिमा’

ग्वालियर।
राय महिला मंडल ग्वालियर के तत्वावधान में कलवार, कलार, कलाल समाज के आराध्य राज राजेश्वर भगवान सहस्रबाहु अर्जुन के गुरु दत्तात्रेय भगवान का जन्मोत्सव पारंपरिक तरीके से मनाया गया। बाड़ा क्षेत्र में सेंट्रल लाइब्रेरी के निकट श्री दत्तात्रेय मंदिर में महिला मंडल की पदाधिकारियों और अन्य समाजबंधुओं ने भगवान दत्तात्रेय की पूजा अर्चना कर आरती की।
बता दें कि मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा को दत्तात्रेय जयंती मनाई जाती है। दत्तात्रेय कलचुरी समाज के आराध्य राजराजेश्वर भगवान कार्तवीर्य सहस्त्रबाहु अर्जुन के गुरू थे, और उन्हें तंत्र विद्या में दीक्षित किया था। दत्तात्रेय के आशीर्वाद से ही राजा कृतवीर्य के पुत्र अर्जुन को सहस्रबाहु अर्जुन का नाम मिला। सहस्रबाहु का शाब्दिक अर्थ ‘हजार भुजाओं वाला’ होता है। इसी के चलते कलचुरी समाज के लिए यह दिवस गुरु पूर्णिमा के समान होता है। लिहाजा मंगलवार, 14 दिसंबर को मार्गशीर्ष पूर्णिमा को राय महिला मंडल ग्वालियर के तत्वावधान में कलचुरी समाज ने पूर्ण श्रद्धाभाव से भगवान दत्तात्रेय का प्राकट्योत्सव मनाया।
सभी ने भगवान दत्तात्रेय की आरती और पूजा अर्चना कर उन्हें भोग लगाया और प्रसाद वितरण किया। इस दौरान राय कलचुरी महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती छाया राय, महामंत्री श्रीमती मीना राय, कोषाध्यक्ष श्रीमती आशा राय, सुहाना राय, प्रीति राय के साथ ही कलचुरी कलार महासभा ग्वालियर के अध्यक्ष श्री सुरेशचंद्र शिवहरे, महामंत्री श्री रघुवीर राय, श्री कमल जायसवाल, श्री हुकुमचंद जायसवाल, श्री रामस्वरूप जायसवाल, श्री अशोक राय, श्री नरेश शिवहरे और भाजपा नेता एवं समाजसेवी श्री हरिओम राय समेत कई अन्य समाजबंधु भी उपस्थित रहे।
यहां यह भी बताते चलें कि भगवान दत्तात्रेय को सनातन धर्म के त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश का संयुक्त रूप माना जाता है। नाथ संप्रदाय के प्रवर्तकों में शामिल दत्तात्रेय ने वेद और तंत्र मार्ग को सम्मिलित किया था। दत्तात्रेय ने मुनि सांकृति को अवधूत मार्ग, नागार्जुन को रसायन विद्या और परशुराम को श्रीविद्या-मंत्र प्रदान किया था। उन्होंने गोरखनाथ को योगासन और शिवजी के पुत्र कार्तिकेय को भी अनेक विद्यायें प्रदान की थीं। खास बात यह है कि दत्तात्रेय भगवान बहुत बड़े वैज्ञानिक थे और उन्होंने रसायन शास्त्र में काफी शोध किया था। उन्हें पारा यानी मर्करी के माध्यम से वायुयान उड़ाने की प्रक्रिया ज्ञात थी।
गुरू दत्तात्रेय ने मानव को प्रकृति से जोड़ने के लिए चींटी, गाय, कुत्ता, अजगर, दीमक, कबूतर आदि समेत 24 गुरू बनाए। इसका मंतव्य यह कि दत्तात्रेय ने जिसके अंदर जो अच्छाई थी, उसे ग्रहण किया, और संदेश दिया कि हमें अच्छी बातों को ग्रहण करना चाहिए, तभी मानव कल्याण संभव है।

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