कानपुर।
दुनिया के सबसे पवित्र और खूबसूरत रिश्तों में एक है भाई-बहन का रिश्ता। त्याग और समर्पण का रिश्ता जिसमें एक भाई हमेशा ढाल बनकर बहन के लिए खड़ा रहता है तो बहन हर मुश्किल में भाई का संबल बन जाती है। आज रक्षाबंधन के पावन पर्व की पूर्व संध्या पर हम प्रस्तुत कर रहे हैं भाई-बहन के रिश्ते की एक प्रेरणादायी कहानी जो हमारे ही बीच से निकली है।

बीते सोमवार को कानपुर के सरसौल (हाथीगांव) स्थित ‘श्री नंदेश्वर महादेव धाम’ में एक भाई-बहन की जोड़ी लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गई। बहन कंधे पर कांवड़ उठाए नंगे पांव चली आ रही थी, और भाई व अन्य परिवारीजन उस महिला के पीछे चल रहे थे। लोगों ने कौतुहुलवश जानकारी की तो जो कहानी सामने आई, वह मीडिया की सुर्खी बन गई। कंधे पर कांवड़ उठाए महिला का नाम अंजू गुप्ता था, जो अपने उनके छोटे भाई गोविंद शिवहरे को साथ लेकर आई थीं। अंजू गुप्ता दस किलोमीटर दूर नजफगढ़ गंगा घाट से कांवड़ में गंगाजल भरकर नंगे पांव पैदल चली आ रही थी। अंजू गुप्ता ने नंदेश्वर महादेव से मन्नत मांगी थी कि उनका भाई गोविंद शिवहरे ठीक होकर घर आ जाएगा तो वह गंगा जल से उनका अभिषेक करेंगी।

कानपुर में एसडीएम नर्वल के स्टेनो गोविंद शिवहरे को कुछ समय पूर्व एक गंभीर बीमारी ने जकड़ लिया था। उनकी हालत इतनी नाजुक हो गई थी कि अस्पताल के आईसीयू में वेंटीलेटर पर लेना पड़ा जहां वह तीन महीने तक मौत से जंग लड़ते रहे। अंजू गुप्ता से भाई की यह हालत देखी नहीं गई और वह भगवान शिव की शरण में पहुंच गईं। उन्होंने नंदेश्वर महादेव से भाई के लिए मन्नत मांगी। अंजू गुप्ता ने बताया कि नंदेश्वर महादेव ने उनकी सुन ली और ऐसी कृपा की कि बहुत जल्द ही उनका प्यारा भाई गंभीर बीमारी से निकलकर सकुशल घर लौट आया।

महादेव ने तो अपना काम कर दिया, अब बारी मंजू गुप्ता की थी। सावन के तीसरे सोमवार को वह गोविंद शिवहरे के साथ नजफगढ़ गंगा घाट गईं और वहां से कांवड़ में पवित्र गंगाजल भरकर करीब 10 किलोमीटर का लंबा सफर तय बिना चप्पलों के पैदल ही तय करके नंदेश्वर धाम पहुंचीं। मंदिर में उन्होंने भाई के साथ विधि-विधान से भगवान शिव का जलाभिषेक कर उनका आभार व्यक्त किया। अंजू गुप्ता कल रक्षाबंधन पर अपने भाई को राखी बांधेंगी और गोविंद शिवहरे हर साल की तरह इस बार भी इस फोटो से अपने फेसबुक वॉल को सजाएगा।
















