बांदा/अयोध्या।
बांदा में ओरन कस्बे के 25 वर्षीय कैमिकल इंजीनियर आशीष शिवहरे की मौत क्या एक हत्या थी? वह कैसे मरा? किसने मारा? क्यों मारा? ऐसे कई सवालों पर रहस्य बरकरार है। लेकिन, इतना जरूर है कि आशीष की मौत ने उसके परिवार की खुशियों और उम्मीदों की भी मार डाला है।
आशीष शिवहरे का शव अयोध्या की यश पेपर मिल के गंदे पानी के टैंक में उतराता मिला था, जहां पिछले चार साल से वह नौकरी कर रहा था। परिवारीजनों ने मिल के मैनेजर समेत सात लोगों के खिलाफ हत्या का धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। सोमवार को आशीष के शव को पोस्टमार्टम के बाद ओरन लाया गया, जहां गमगीन माहौल में उसका अंतिम संस्कार किया गया।
उधर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो मामले की गंभीरता की ओर इशारा कर रहे है। परिजनों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देकर बताया कि उसके 17 जगह चोंट के निशान मिले हैं। बुधवार सुबह 6 बजे परिजन गोरखपुर में मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी पीड़ा बताएंगे। इसको लेकर आशीष के पिता आनंद शिवहरे, मां गंगा शिवहरे, बहन ज्योति और चाचा सुनील शिवहरे व राकेश शिवहरे मंगलवार देर शाम कार से लखनऊ के लिए रवाना हो गए हैं।
आशीष अपने चार भाई-बहनों में सबसे बड़ा था। उसने कानपुर से इंटरमीडियेट करने के बाद पंजाब से कैमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी और पिछले चार साल से अयोध्या में यश पेपर मिल में काम कर रहा था। आशीष अपने दोनों छोटे भाइयों अभिषेक और जतिन का भविष्य संवारना चाहता था, और बहन ज्योति की धूमधाम से शादी करने का सपना संजोया था। लेकिन उसकी असमय मौत से परिवार के सपने बिखर गए।
आशीष ने मौत से पहले अपनी मां गंगा को फोन कर बताया था कि वह अपने बॉस से परेशान है। रुपये उधार लेने बाद वापस नहीं कर रहा है। उल्टे उसे प्रताड़ित कर रहा है। उसने बताया था कि उसके कंप्यूटर सिस्टम से जबरन इस्तीफे का मेल भी डलवा दिया गया है। परिवारीजनों का आरोप है कि आशीष से उसके मैनेजर अभिषेक सिंह ने तीन लाख रुपये उधार लिए थे। पैसे वापस मांगने पर उसने परेशान करना शुरू कर दिया।
परिवारीजनों के मुताबिक, बीते शुक्रवार को आशीष की दिन में ड्यूटी लगी थी। इसके बाद रात में भी उसकी ड्यूटी लगा दी गई। रात को ड्यूटी के दौरान करीब 10 बजे आशीष ने मां को फोन लगाकर कहा कि वह अपने सीनियर मैनेजर से बहुत परेशान है। गंगा ने उसे ढांढस बंधाते हुए कुछ दिनों के लिए घर आने की बात कही। लेकिन अगले दिन शनिवार को आशीष ने बताया कि मैनेजर उसे छुट्टी नहीं दे रहा है। यह भी कहा कि ‘मम्मी, आप मैनेजर से बात कर लो..।’ इतना कहते ही फोन काट दिया।
शनिवार-रविवार की दरम्यानी रात रात करीब डेढ़ बजे आशीष के दोस्तों ने परिजनों को फोन कर तत्काल आने को कहा। परिजन रविवार सुबह करीब छह बजे अय़ोध्या पहुंचे। मिल में उनकी मौजूदगी में आशीष के शव को टैंक से बाहर निकाला गया। आशीष के चाचा सुनील शिवहरे और राकेश शिवहरे का कहना है कि शव ट्रीटमेंट प्लांट के टैंक में मुंह के बल पड़ा था। शव के कपड़े पाइप में फंसे थे। पैर, सीने और हाथ में चोट के निशान थे। जूते भी बाहर पड़े थे। उनका कहना था कि फैक्ट्री में बाकी सभी जगह सीसीटीवी कैमरे सक्रिय हैं लेकिन ट्रीटमेंट प्लांट के पास पहले से लगे कैमरों को संदिग्ध परिस्थितियों में हटा दिया गया था। परिवारीजनों को आशंका है कि आशीष की हत्या के बाद शव को टैंक में फेंका गया।
(ओरन में शिवहरेवाणी के संवादसूत्र श्याम सुंदर शिवहरे के इनपुट पर आधारित)
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इंजीनियर आशीष शिवहरे की मौत पर कई सवाल; 17 जगह चोटें; सीएम योगी से न्याय की गुहार लगाएंगे परिजन
- by admin
- September 29, 2026
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